चंडीगढ़। हरियाणा के सात जिलों भिवानी, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी तथा सिरसा में 131 जलाशय, झीलें और तालाब बनाए जाएंगे। इससे बरसाती पानी को सहेजने के साथ ही भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा जींद में दो, कैथल में एक और गुरुग्राम के धनवापुर में एक प्रमुख सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से उपचारित जल का पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। 28,000 एकड़ क्षेत्र को लाभान्वित करने वाले इन एसटीपी पर 282.13 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
विश्व बैंक ने प्रदेश को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना के अंतर्गत 5,715 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति दी है। इसमें से चार हजार करोड़ रुपये का ऋण विश्व बैंक द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा और शेष 1715 करोड़ रुपये राज्यनिधि द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा। इस परियोजना के तहत राज्य में 15 क्लस्टर बनाए जाएंगे, जिनका कुल क्षेत्रफल 48.94 लाख एकड़ है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना को लेकर कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी और अधिकारियों के साथ स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी-सी की बैठक ली। विश्व बैंक के सहयोग से 2,485 करोड़ रुपये की लागत से 104 नहरों का पुनर्वास किया जाएगा।
सूक्ष्म सिंचाई एवं कमान क्षेत्र विकास प्राधिकरण (मिकाडा) के माध्यम से 620 वाटर कोर्सेज (खालों) का पुनरुद्धार किया जाएगा, जिससे 3.18 लाख एकड़ भूमि पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा 120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं क्रियान्वित की जाएंगी, जिससे 56,830 एकड़ भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा।
प्रदेश में दो लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि का सुधार किया जाएगा। सीधी बिजाई (डीएसआर) तकनीक के माध्यम से पांच लाख एकड़ भूमि पर धान की सीधी बिजाई और 1.12 लाख एकड़ भूमि पर फसल विविधीकरण को अपनाने के लिए कार्य किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना के पूर्ण होने पर हरियाणा राज्य की सभी नहरों का पुनर्वास संभव हो सकेगा, जिससे प्रदेश की सभी नहरों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। इस दौरान मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, वित्त और योजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल ने भी अपनी बात रखी।
