देहरादून: भारतीय सेना से चार साल की सेवा पूरी कर लौटने वाले अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में उत्तराखंड सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बाद प्रदेश में जल्द ही ‘अग्निवीर रोजगार सेल’ (एआरसी) का गठन किया जाएगा.
सरकार का दावा है कि उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बनेगा, जहां सेना से बाहर आने वाले अग्निवीरों को रोजगार से जोड़ने के लिए संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाएगी. इस सेल की रूपरेखा तैयार करने की जिम्मेदारी उत्तराखंड राज्य पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष एवं यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल को सौंपी गई है.
अंतिम चरण में अग्निवीर रोजगार सेल के गठन की प्रक्रिया: बीजेपी नेता कर्नल अजय कोठियाल ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से बीती 17 जुलाई को युवा अग्निवीर संवाद कार्यक्रम में की गई घोषणा को अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. अग्निवीर रोजगार सेल के गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही इसका शासनादेश जारी होने की उम्मीद है. धामी सरकार अग्निवीरों के भविष्य को लेकर गंभीर है और प्राथमिकता के आधार पर इस दिशा में काम कर रही है.
कर्नल कोठियाल ने बताया कि एआरसी का उद्देश्य सेना से लौटने वाले अग्निवीरों को केवल नौकरी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनकी क्षमता, अनुभव और रुचि के अनुरूप उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के लिए तैयार करना होगा. इसके लिए विशेष स्किल डेवलपमेंट और कैप्सूल कोर्स संचालित किए जाएंगे, ताकि अग्निवीरों को बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा सके. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और कॉरपोरेट सेक्टर के साथ समन्वय स्थापित कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे.
“प्रदेश सरकार पहले ही अग्निवीरों के लिए विभिन्न सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था कर चुकी है. इसके अलावा जो अग्निवीर सरकारी सेवाओं में चयनित नहीं हो पाएंगे, उन्हें एआरसी के माध्यम से निजी क्षेत्र और अन्य संस्थानों में रोजगार दिलाने की व्यवस्था की जाएगी. इसके लिए 50 से ज्यादा विभिन्न कार्यक्षेत्रों और विशेषज्ञताओं की सूची तैयार की जा रही है, जिनमें अग्निवीरों के अनुभव का उपयोग किया जा सके.“- अजय कोठियाल, बीजेपी नेता
इन क्षेत्रों में अग्निवीरों को मुहैया कराया जाएगा रोजगार: कर्नल कोठियाल के मुताबिक, अग्निवीरों को आपदा प्रबंधन, पर्यटन, होटल उद्योग, सुरक्षा सेवाएं, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि, खेल और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है. उन्होंने कहा कि सेना में चार सालों के दौरान अग्निवीर अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और तकनीकी कौशल विकसित करते हैं, जिसका लाभ विभिन्न सरकारी और निजी संस्थानों को मिल सकता है.
इसी मकसद से कॉरपोरेट सेक्टर के साथ भी विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है. उन्होंने ये भी बताया कि प्रस्तावित अग्निवीर रोजगार सेल सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय की निगरानी में कार्य करेगा. इससे विभिन्न विभागों और उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित होगा और अग्निवीरों के रोजगार से जुड़े मामलों का त्वरित समाधान किया जा सकेगा. उनका कहना था कि यह व्यवस्था राज्य में पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए एक प्रभावी मॉडल साबित हो सकती है.
साल 2022 में शुरू हुई थी अग्निपथ योजना: गौर हो कि केंद्र सरकार ने साल 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की थी. इसके तहत 17.5 से 21 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की थल सेना, नौसेना और वायुसेना में चार साल के लिए अग्निवीर के रूप में भर्ती की जाती है. सेवा अवधि पूरी होने के बाद प्रदर्शन और योग्यता के आधार पर लगभग 25 फीसदी अग्निवीरों को नियमित सैन्य सेवा में शामिल किया जाता है.
जबकि, बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को अन्य क्षेत्रों में रोजगार तलाशना पड़ता है. इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार उन्हें सरकारी विभागों, केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों और निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए ‘अग्निवीर रोजगार सेल’ के माध्यम से समन्वित व्यवस्था विकसित करने की तैयारी में जुटी है.
