पंजाब मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को एक नागरिक-केंद्रित नीति को मंजूरी देते हुए जमीन मालिकों को नदियों, मौसमी चो और नालों से गाद निकालने का काम अपने खर्च पर करने की अनुमति दे दी। इसके साथ ही जमीन मालिकों को निकाली गयी मिट्टी का मुफ्त उपयोग करने का अधिकार भी दिया दिया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यहां जारी बयान में कहा गया है कि इस कदम का उद्देश्य मानसून से पहले बाढ़ की तैयारियों को मजबूत करना और महत्वपूर्ण नदियों के जल प्रवाह में सुधार लाना है। इस पहल से गाद निकालने में सुविधा होगी, नदियों और नालों की वहन क्षमता में वृद्धि होगी और बाढ़ का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा, जिससे सार्वजनिक और निजी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
सरकार ने 9 महत्वपूर्ण स्थानों की पहचान की है, जहां मानसून से पहले गाद निकालना जरूरी है, जिससे पानी का प्रवाह सुचारू बना रहे। यदि इन स्थानों पर समय रहते सफाई नहीं की गई तो गाद जमा होने से जलधाराओं की क्षमता घट सकती है और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
इसके साथ ही कैबिनेट ने ग्राम पंचायतों के सरपंचों, जिला परिषदों और पंचायत समिति के चेयरमैन के पदों के आरक्षण की स्वीकृति भी प्रदान की है। इस संशोधन का उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जाति की महिलाओं, महिलाओं और सामान्य वर्ग के बीच प्रतिनिधित्व को संतुलित और तर्कसंगत बनाना है। इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि राज्य में जिला परिषदों की कुल संख्या का 10 प्रतिशत या उससे अधिक प्रभावित होता है तो आरक्षण का रोस्टर नये सिरे से तैयार किया जाएगा।
