पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है। पार्टी नेतृत्व राज्य के उन प्रमुख मुद्दों पर गहन मंथन कर रहा है जिन्हें आगामी चुनाव में मतदाताओं के बीच प्रमुखता से उठाया जाएगा। इसी क्रम में बंदी सिखों की रिहाई का मुद्दा भी भाजपा के लिए महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरा है। पंजाब भाजपा के कई नेता चाहते हैं कि इस संवेदनशील और भावनात्मक विषय पर पार्टी हाईकमान अपना स्पष्ट रुख सामने रखे ताकि चुनावी मैदान में कार्यकर्ता और नेता एक समान संदेश लेकर जनता के बीच जा सकें।
बंदी सिखों की रिहाई का मुद्दा लंबे समय से पंजाब की राजनीति के केंद्र में रहा है। विभिन्न सिख संगठनों और धार्मिक जत्थेबंदियों की ओर से लगातार यह मांग उठाई जाती रही है कि जिन सिख कैदियों की सजा पूरी हो चुकी है, उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत रिहा किया जाए। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और अन्य राजनीतिक दल भी समय-समय पर इस विषय को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाते रहे हैं। ऐसे में भाजपा भी इस मुद्दे की राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता को समझते हुए अपनी रणनीति तैयार कर रही है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा नेतृत्व का मानना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान यह विषय प्रमुखता से उठेगा और विपक्षी दल इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना सकते हैं। इसी कारण पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने हाईकमान से इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की मांग की है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि चुनाव से पहले केंद्र सरकार कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत कुछ बंदी सिखों की रिहाई पर विचार कर सकती है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
भाजपा ने चुनावी तैयारियों के तहत पंजाब में कई आंतरिक सर्वेक्षण भी कराए हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी ने राज्य की प्रत्येक विधानसभा सीट का अलग-अलग मूल्यांकन कराया है। हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ पंजाब भाजपा नेताओं की बैठक में सीट-दर-सीट समीक्षा की गई। बैठक में संगठनात्मक मजबूती, चुनावी संभावनाओं और स्थानीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
पार्टी नेतृत्व ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब नेताओं और कार्यकर्ताओं की राजनीतिक सक्रियता का मूल्यांकन केवल उनके कार्य और जनसंपर्क के आधार पर किया जाएगा। भाजपा हाईकमान का मानना है कि पंजाब में राजनीतिक विस्तार के लिए नेताओं को जमीनी स्तर पर अधिक सक्रिय होना होगा। इसके लिए उन्हें क्षेत्र में लगातार लोगों के बीच रहकर संगठन को मजबूत करना और पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाना होगा।
भाजपा आगामी महीनों में कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ विशेष ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इन सत्रों का उद्देश्य चुनावी मुद्दों की गहन समझ विकसित करना और कार्यकर्ताओं को प्रभावी संवाद के लिए तैयार करना होगा। पार्टी चाहती है कि बूथ स्तर तक का प्रत्येक कार्यकर्ता पंजाब से जुड़े प्रमुख विषयों की जानकारी रखे और जनता के बीच पार्टी का पक्ष मजबूती से प्रस्तुत कर सके।
भाजपा जिन प्रमुख मुद्दों को चुनावी एजेंडे में शामिल करने जा रही है उनमें किसान और कृषि संकट, युवाओं का भविष्य, बढ़ता नशा, हथियारों की तस्करी, बिगड़ती कानून-व्यवस्था, राज्य की वित्तीय स्थिति और पंजाब के समग्र विकास जैसे विषय प्रमुख हैं। पार्टी का मानना है कि इन मुद्दों पर केंद्रित अभियान के जरिए वह मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर सकती है और आगामी विधानसभा चुनाव में मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में उभर सकती है।
