पटना : बिहार के कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि प्रदेश में पैदा होने वाले विदेशी आम को अब नया नामकरण किया जाएगा. ऐसा नामकरण होगा जो लोगों की जुबान पर बोलने में सुलभ हो और नई पीढ़ी उस किस्म की आम को आगे बढ़ा सकें. कृषि मंत्री ने मंच से ही हॉर्टिकल्चर डायरेक्टर को निर्देश दिया कि विदेशी आम जो बिहार के किसान पैदा कर रहे हैं तो उसके लोकल क्षेत्र और किसान की भावना को देखते हुए नया नामकरण किया जाए.
पटना में आम महोत्सव: दरअसल, बिहार नर्सरी मेन एसोसिएशन की ओर से पटना में इन दोनों दो दिवसीय आम महोत्सव शुरू हुआ है. जहां 100 से अधिक दुर्लभ एवं प्रीमियम किस्म के आम प्रदर्शित किए गए हैं. इसके अलावा आम के फल लगे हुए आम के पौधे भी उपलब्ध है. जिसे लोग खरीद सकते हैं और बागवानी तैयार कर सकते हैं. इस आम महोत्सव के उद्घाटन में एक आम के फल पर बनाई गई अपनी तस्वीर को देखकर कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने प्रसन्नता जाहिर की.
फल के नाम क्यों नहीं बदल सकते? : विजय सिन्हा ने कहा कि महोत्सव में घूमने के क्रम में बहुत सुंदर आम दिखाई पड़े, लेकिन नाम सुनने पर ऐसा लग रहा था जैसे कि वह किसी विदेश के आम महोत्सव में घूम रहे हैं. आदमी जब यूरोप में जाता है तो यूरोपीय नामकरण होने लगता है और भारत में आने पर देसी नामकरण रखता है, तो फल के नाम में ऐसा क्यों नहीं हो सकता.
‘किसानों को सशक्त करना जरूरी’: कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि वह भौकाल दिखाने वाला काम नहीं करते हैं, वह सरोकार वाला काम करते हैं जिससे कि अधिक से अधिक लोगों को फायदा हो सके. उन्होंने कहा कि आज के समय में बिहार में 75 प्रतिशत आबादी किसान की है और 91 प्रतिशत सीमांत किसान हैं. बिहार को विकसित बिहार बनाने के लिए किसानों को सशक्त करना जरूरी है.
”किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए लैब से लेकर लैंड तक की यात्रा को सुगम किया जा रहा है. कृषि में अनुसंधान को बढ़ावा देते हुए परंपरागत खेती से इतर फलों की खेती और बाजार के अनुरूप उत्पादों के उत्पादन पर बढ़ावा दिया जा रहा है.”– विजय सिन्हा, कृषि मंत्री, बिहार
‘फलों का राजा आम’: कृषि मंत्री ने कहा कि दुनिया भर में भारत में सबसे अधिक आम की पैदावार होती है और आम को सभी फलों का राजा माना जाता है. इस पर कई कविताएं भी हैं और हमारे लोक जीवन और सांस्कृतिक जीवन में भी आम का बहुत महत्व है. बिना आम के पत्ते का कोई भी मंगल कार्य पूरा नहीं होता है.
”किसानों से अपील करेंगे कि जो आम की बागवानी कर रहे हैं, वह आम के पेड़ में जैविक खाद ही डालें और रासायनिक खाद का उपयोग न करें. बिहार में विभिन्न प्रकार के आम का उत्पादन होता है. हमारी कोशिश है कि दुनिया भर के आम महोत्सव में भारत की ओर से बिहार आम में इतना बेहतर करे कि वह राष्ट्रीय सम्मान का ध्वजवाहक बने.”– विजय सिन्हा, कृषि मंत्री, बिहार
‘AC में बैठकर नीति तैयार नहीं होगी’: कृषि मंत्री ने कहा कि बागवानी को लेकर के नई नीति हॉर्टिकल्चर डिपार्मेंट तैयार कर रहा है. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दे दिया है कि एसी कमरे में बैठकर नीति तैयार नहीं होगी. नीति बनाने के लिए किसानों से, नर्सरी संचालकों से और बागवानी के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों से मिलकर उनके विचार जानने होंगे.
”अधिकारी जमीन पर उतरकर खेत बागान में जाकर किसानों से संवाद करें. इसके बाद जो चीज की कमी है और कैसे इसमें बेहतर हो सकता है, इसके साथ ही और क्या नीति लाई जा सकती है कि किसानों की आमदनी बढ़ सके, इस पर संवाद करके नई नीति तैयार हो.”– विजय सिन्हा, कृषि मंत्री, बिहार
दुर्लभ एवं प्रीमियम किस्मों के आम प्रदर्शित: दरअसल, पटना के आशियाना दीघा रोड स्थित बधाई बैंक्विट हॉल में बिहार नर्सरी मेन एसोसिएशन की ओर से दो दिवसीय आम महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. इसमें 100 से अधिक दुर्लभ एवं प्रीमियम किस्मों के आम प्रदर्शित किए गए हैं. इनमें दुनिया भर में चर्चित मियाजाकी, रेड आइवरी, आर2ई2, बारी-4, कैटिमोन, सेंसेशन, सिंधु सीडलैस, अल्फांसो, जर्दालू, गुलाबखास, लंगड़ा, मालदह सहित कई देसी और विदेशी किस्मों के आम शामिल हैं.
इसके अलावा विभिन्न नर्सरी संचालकों और किसानों द्वारा स्टॉल लगाए गए हैं, जहां से आगंतुक सीधे दुर्लभ आमों के फल और उनके पौधे खरीद सकते हैं. इसके अलावा हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के साइंटिस्ट द्वारा खत्म हो रहे बाग को पुनर्जीवित करने के टिप्स भी दिए जा रहे हैं.
