चंडीगढ़: नायब सरकार शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत देने की कार्ययोजना तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से विभागों से उन कर्मचारियों का डाटा मांगा है, जोकि कम काम करते हैं। सभी प्रशासनिक अधिकारी, विभागाध्यक्षों और सचिवों को निर्देश जारी किए गए हैं कि गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए विभागों द्वारा कर्मचारियों की सूची तैयार की जाए।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक कार्यों में बार-बार ड्यूटी लगाने पर कड़ा संज्ञान लिया है। दरअसल, शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी लगाने के कारण न केवल पढ़ाई प्रभावित होती है, बल्कि परीक्षा परिणाम पर भी असर पड़ता है। लिहाजा, मुख्यमंत्री कार्यालय ने इन तमाम समस्याओं पर संज्ञान लेते हुए विभागाध्यक्षों को निर्देश जारी किए हैं।
ऐसे कर्मचारियों की पहचान की जाए, जोकि पूर्णकालिक या स्पष्ट रूप से परिभाषित ड्यूटी नहीं हैं, जिन्हें गैर-शैक्षणिक या बहु उद्देशीय कार्यों का जिम्मा सौंपा जा सके। ऐसे कर्मचारियों की सेवाओं का उपयोग किए जाने से शिक्षण स्टाफ अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी यानी शिक्षण और अन्य शैक्षणिक कार्यों पर पूरा ध्यान दे सकेगा।
मुख्य सचिव कार्यालय के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से सभी प्रशासनिक सचिवों को भेजे गए पत्र में विभागों के ऐसे कर्मचारियों की जानकारी मांगी गई है। सभी प्रशासनिक सचिवों से दो बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है। इनमें पहला, उनके प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाली ऐसी कर्मचारी श्रेणियां हैं, जिनकी स्पष्ट या पूर्णकालिक ड्यूटी नहीं है अथवा जिनकी मौजूदा ड्यूटी अतिरिक्त बहुउद्देशीय कार्यों के लिए तैनाती की अनुमति देती है।
दूसरा, ऐसे कर्मचारियों की जानकारी मांगी गई है जिन्हें गैर-शैक्षणिक/बहुउद्देशीय कार्यों के लिए पूरी तरह या आंशिक रूप से उपलब्ध कराया जा सकता है।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी बैठक
गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए कर्मचारियों का विकल्प तलाशने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 7 अक्टूबर को बैठक होगी, जिसमें तमाम प्रशासनिक सचिव और विभागाध्यक्ष मौजूद रहेंगे। कर्मचारियों की उपलब्धता और तैनाती की समीक्षा के बाद मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से फैसला लिया जा सकता है कि किन विभागों के कर्मियों को गैर-शैक्षणिक कार्य सौंपा जाएगा।
