शिमला। प्रदेश में हेडटीचर पद पर पदोन्नत जेबीटी शिक्षकों को राहत मिली है। सरकार ने हेडटीचर की पदोन्नति को महज प्लेसमेंट मानने के बजाय नियमित पदोन्नति माना है। ऐसे में पात्र शिक्षकों को पदोन्नति से जुड़े वित्तीय लाभ और वेतन निर्धारण का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
विधि विभाग ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को आगे चुनौती देने के बजाय इसे लागू करने की सलाह दी है। शिक्षा सचिव ने विभाग के निदेशक को पत्र जारी कर विधि विभाग की राय के अनुसार तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
विधि विभाग ने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि हेडटीचर का पद 100 प्रतिशत पात्र जेबीटी शिक्षकों में से पदोन्नति के आधार पर भरा जाता है। इसलिए इसे केवल प्लेसमेंट या पदनाम बदलने की प्रक्रिया नहीं माना जा सकता।
पदोन्नति के साथ मिलने वाले सामान्य वित्तीय लाभ भी कर्मचारियों को देय होंगे। हाई कोर्ट ने भी माना है कि हेडटीचर के पद पर अधिक जिम्मेदारियां होती हैं और पदोन्नति का उद्देश्य कर्मचारियों को प्रोत्साहन देना है।
हेडटीचर पद को पदोन्नति के बजाय प्लेसमेंट से भरने के लिए भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में संशोधन का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है। विधि विभाग ने स्पष्ट किया कि जब तक नियमों में विधिवत संशोधन नहीं होता मौजूदा नियम प्रभावी रहेंगे।
ऐसे में पदोन्नति से मिलने वाले वित्तीय लाभ को कार्यकारी आदेशों के आधार पर नहीं रोका जा सकता। विभाग को हाई कोर्ट के 26 जून 2025 के फैसले को लागू करने की दिशा में कार्रवाई करने की सलाह दी गई है।
