हरिद्वार। उत्तराखंड के धार्मिक और ऐतिहासिक जिले हरिद्वार के गुड़ को केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) के तहत विशेष पहचान दी गई है। कभी केवल स्थानीय बाजारों और पारंपरिक कोल्हुओं तक सीमित रहने वाला हरिद्वार का गुड़ अब आधुनिक ब्रांडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता सुधार के बल पर देश-विदेश के बाजारों में अपनी मिठास घोल रहा है।
गन्ने के रिकॉर्ड उत्पादन के लिए मशहूर हरिद्वार जिले को इस योजना के माध्यम से एक नया औद्योगिक और कृषि-आधारित संबल मिला है। इससे न केवल स्थानीय किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है, बल्कि गुड़ प्रसंस्करण से जुड़े हजारों कारीगरों और मजदूरों को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
हरिद्वार के गुड़ की क्या हैं खास बातें?
हरिद्वार के मैदानी इलाकों (जैसे लक्सर, रुड़की, भगवानपुर) का गन्ना अपनी उच्च शर्करा मात्राऔर गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। इसी बेहतरीन गन्ने से तैयार होने वाला गुड़ कई मायनों में अनूठा है।
- पूरी तरह प्राकृतिक और केमिकल-मुक्त: हरिद्वार में पारंपरिक एवं आर्गेनिक तरीकों से गुड़ तैयार किया जाता है। इसमें किसी भी तरह के हानिकारक रसायनों या कृत्रिम रंगों का प्रयोग नहीं होता।
- स्वाद के साथ सेहत का खजाना: आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर यह गुड़ पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और शरीर को ऊर्जा देने में बेहद मददगार माना जाता है।
- स्वादिष्ट और पौष्टिक फ्लेवर्स: ODOP योजना के तहत अब यहाँ केवल साधारण गुड़ ही नहीं, बल्कि सौंफ, इलायची, तिल, मूंगफली, अदरक, ड्राई फ्रूट्स और अजवाइन मिला हुआ फ्लेवर्ड गुड़ भी तैयार किया जा रहा है, जिसकी मांग बड़े शहरों के साथ-साथ विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है।
- आधुनिक पैकेजिंग और हाइजीन: पहले जहां गुड़ खुले में बिकता था, वहीं अब इसे आकर्षक, हाइजीनिक और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाली वैक्यूम पैकेजिंग में बेचा जा रहा है।
हरिद्वार के गुड़ को ODOP में शामिल करने और इसके विकास पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार राज्य के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हरिद्वार का गन्ना और यहां का गुड़ राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना के माध्यम से हमने हरिद्वार के गुड़ को एक विशिष्ट पहचान दी है। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हमारे किसानों और छोटे कोल्हू संचालकों को उनके कड़े परिश्रम का सही मूल्य मिले। आधुनिक तकनीक, बेहतर पैकेजिंग और आसान लोन सुविधाओं के जरिए हरिद्वार के गुड़ उद्योग को एक नई ऊँचाई पर पहुँचाया जा रहा है, जिससे ‘वोकल फॉर लोकल’ का संकल्प साकार हो रहा है।
किसानों और गुड़ उत्पादकों में उत्साह:
ODOP योजना के लागू होने से हरिद्वार के गन्ना किसानों और पारंपरिक गुड़ उत्पादकों (कोल्हू मालिकों) के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
लक्सर क्षेत्र के गन्ना किसान रामपाल सिंह बताते हैं कि पहले गन्ने के भुगतान के लिए हमें चीनी मिलों के चक्कर काटने पड़ते थे और कई बार महीनों इंतजार करना पड़ता था लेकिन जब से गुड़ को ODOP में चुना गया है, स्थानीय कोल्हुओं और क्रशरों में गन्ने की मांग काफी बढ़ गई है। अब हमें गन्ने का नकद और बेहतर दाम मिल जाता है। जैविक तरीके से बने गुड़ की मांग इतनी है कि व्यापारी खेत से ही बुकिंग कर रहे हैं।
वहीं, रुड़की में पिछले दो दशकों से गुड़ बनाने का काम कर रहे कारीगर और क्रेशर संचालक शमशेर अली ने कहा कि ODOP योजना ने हमारे पुराने ढर्रे के व्यवसाय को आधुनिक रूप दे दिया है। सरकार की ओर से हमें हाइजीनिक तरीके से गुड़ बनाने की ट्रेनिंग और पैकेजिंग के लिए सब्सिडी वाली मशीनें मिली हैं। पहले हम सिर्फ 40-50 रुपये किलो में सादा गुड़ बेच पाते थे, लेकिन अब ड्राई फ्रूट्स और आयुर्वेदिक फ्लेवर वाला गुड़ 120 से 150 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। हमारी कमाई में सीधी बढ़ोतरी हुई है।
स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
हरिद्वार जिले में गुड़ उद्योग के विस्तार से क्षेत्र के युवाओं के लिए भी स्वरोजगार के नए द्वार खुले हैं। कई युवा स्टार्टअप्स अब हरिद्वार के गुड़ की ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए देशभर में ऑनलाइन डिलीवरी कर रहे हैं। राज्य सरकार की मंशा हरिद्वार को आने वाले समय में “जैविक गुड़ हब” के रूप में विकसित करने की है, जिससे न केवल राज्य का राजस्व बढ़ेगा बल्कि पलायन को रोककर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा।
