शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के मालरोड स्थित ऐतिहासिक बैंटनी कैसल अब पर्यटन का नया आकर्षण बनेगा। यहां हिमाचल प्रदेश का पहला डिजिटल संग्रहालय तैयार हो गया है, जिसका शुभारंभ शुक्रवार (10 जुलाई) को मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू करेंगे। इसके बाद संग्रहालय आम लोगों और पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।
करीब आठ करोड़ रुपये की लागत से बने इस डिजिटल संग्रहालय में 10 कक्ष हैं, जहां भाषा एवं संस्कृति विभाग और राज्य संग्रहालय ने इंटरएक्टिव टच स्क्रीन तथा वर्चुअल रियलिटी डिवाइस स्थापित किए हैं।
रुचि अनुसार आइकन चुन सकेंगे पर्यटक
पर्यटक अपनी रुचि के अनुसार आइकन चुनकर हिमाचल के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में प्रदेश के योगदान, लोक संस्कृति, खानपान, वेशभूषा, रहन-सहन और सांस्कृतिक विरासत की जानकारी डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे।
1830 में निर्मित भवन में चलेगा म्यूजियम
वर्ष 1830 में अंग्रेज अधिकारी कैप्टन बैंटनी द्वारा निर्मित इस भवन का 1880 में सिरमौर रियासत ने पुनर्निर्माण कराया था। इसे कैप्टन ए गार्डन ने सिरमौर रियासत के राजा अमर प्रकाश बहादुर को बेच दिया था। प्रदेश सरकार ने 2017 में इसका अधिग्रहण कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया।
25 करोड़ से हुआ भवन का जीर्णोद्धार
18 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में फैले बैंटनी कैसल के जीर्णोद्धार पर करीब 25 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। खूबसूरत पहाड़ों के बीच इस भवन के एक तरफ शिमला का मशहूर ग्रैंड होटल और दूसरी तरफ सीटीओ भवन है।
टिकट व टाइमिंग तय
संग्रहालय प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक खुला रहेगा। इसके बाद पर्यटक लाइट एंड साउंड शो का आनंद ले सकेंगे, जिसके लिए प्रति व्यक्ति 100 रुपये का टिकट निर्धारित किया गया है।
वर्ष 2023 से चलता है लाइट एंड साउंड शो
वर्ष 2023 से यहां लाइट एंड साउंड शो भी संचालित हो रहा है, जिसमें शिमला का इतिहास, महात्मा गांधी का शिमला प्रवास, कांगड़ा कलम, चंबा थाल, कांगड़ी टोपी, शॉल, प्रदेश के प्रमुख स्मारक और प्रथम मुख्यमंत्री डा. वाईएस परमार सहित मालरोड का1890, संजौली का 1845, पीटरहाफ का 1865 और विलो बैंक का 1860 जैसे कई ऐतिहासिक प्रसंग प्रदर्शित हैं।
