यूपी में सभी दल वोट बैंक को साधने में लगे है। इसी तरह ‘निषाद’ वोट बैंक को भी अपने पाले में करने में लगे हैं। इसी क्रम में वीआईपी ने भी यूपी में एंट्री ली है।विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने कहा कि हम हों या संजय निषाद कोई अपने दम पर नहीं बल्कि निषाद समाज के समर्थन से नेता बने हैं। उन्होंने संजय निषाद को चुनौती देते हुए कहा कि छह महीने के अंदर वे भाजपा से निषादों के लिए आरक्षण दिलाएं, नहीं तो भाजपा का साथ छोड़ दें और इंडिया गठबंधन में आएं।
शनिवार को लखनऊ आए सहनी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि निषाद समाज के आरक्षण की लड़ाई लड़ने के कारण भाजपा ने बिहार में हमारे विधायकों को खरीद लिया। उन्होंने कहा कि संजय निषाद भाजपा के साथ चले गए क्योंकि उनके लिए परिवार जरूरी है।
उन्होंने दावा करते हुए कहा कि भाजपा संजय निषाद की राजनीतिक हत्या करने की तैयारी में है। 2027 में जो चुनाव होने वाला है उसमें वे ट्रैक से बाहर चले गए हैं। मुकेश सहनी ने कहा कि वीआईपी यूपी में पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी। उन्होंने संजय निषाद को बड़ा भाई बताते हुए नसीहत दी कि वे समाज के हक और अधिकार की लड़ाई लड़ें। कहा कि पार्टी 25 जुलाई से 101 दिन की यात्रा शुरू करेगी। वीईपी का आरोप है कि 2022 के चुनाव से पहले निषादों को अनुसूचित जाति में शामिल करने और आरक्षण देने का जो वादा किया गया था, वह अब तक अधूरा है।
कई सीटों पर समीकरण बदलते हैं निषाद समाज के लोग
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में निषाद समाज का वोट बैंक लगभग 4.5 प्रतिशत से नौ प्रतिशत के बीच बताया जा रहा है। उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों में से करीब 70 से 80 सीटें ऐसी हैं, जहां निषाद मतदाता समीकरण बदलते हैं। खासकर पूर्वी और पश्चिमी यूपी की नदियों के किनारे बसे क्षेत्रों में इनका खासा प्रभाव है।
