देहरादून में जन संघर्ष मोर्चा के एक प्रतिनिधिमंडल ने मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण मानकों में शिथिलता बरतने और प्रक्रिया को शीघ्र शुरू करने की मांग उठाई।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए सचिव गृह को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने संकेत दिए कि सरकार इस मुद्दे पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी, ताकि वास्तविक आंदोलनकारियों को उनका हक और सम्मान मिल सके।
जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने बताया कि वर्तमान में चिन्हीकरण के लिए तय किए गए मानक काफी जटिल हैं। इन कठिन प्रक्रियाओं के चलते प्रदेश के हजारों सक्रिय राज्य आंदोलनकारी आज भी चिन्हित होने से वंचित हैं, जिससे उनमें निराशा का माहौल है।
नेगी ने स्पष्ट किया कि कई आंदोलनकारी किसी प्रकार के आर्थिक लाभ या पेंशन की अपेक्षा नहीं रखते, बल्कि वे केवल अपने योगदान के सम्मानस्वरूप पहचान चाहते हैं। उनका कहना है कि यह उनके आत्मसम्मान और संघर्ष की मान्यता का विषय है।
उन्होंने बताया कि राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान अधिकांश आंदोलनकारियों ने अपने दस्तावेज सुरक्षित नहीं रखे थे। उस समय पुलिस, प्रशासन और अभिसूचना विभाग द्वारा भी मुख्य रूप से चर्चित व्यक्तियों के नाम ही दर्ज किए गए, जिसके कारण कई वास्तविक आंदोलनकारियों के नाम रिकॉर्ड में शामिल नहीं हो सके।
नेगी ने कहा कि आज भी कई आंदोलनकारी अपनी पहचान मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसे में चिन्हीकरण के मानकों में ढील देकर प्रक्रिया को सरल बनाना बेहद आवश्यक है, ताकि सभी वास्तविक आंदोलनकारियों को उनका सम्मान मिल सके और उनके योगदान को उचित पहचान दी जा सके।
