शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने केंद्र सरकार से राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बहाल करने का पारित संकल्प मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है। अब यह संकल्प केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। विधानसभा सचिवालय ने इस संबंध में प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार को भी सूचित कर दिया है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय को भी प्रस्ताव की प्रति भेजी जाएगी। गौर रहे कि 16वें वित्तायोग ने सिफारिश की है कि देश के 17 राज्यों को दी जा रही आरडीजी बंद कर दी जाए।
प्रदेश सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र में पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद संकल्प पेश कर चर्चा शुरू की थी। लगातार तीन दिन तक चर्चा करने के बाद प्रस्ताव पारित किया गया।
आरडीजी हिमाचल प्रदेश का हक
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में एलान किया कि उनकी पूरी कैबिनेट सारे प्रोटोकाल तोड़ आरडीजी की बहाली के लिए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में प्रधानमंत्री से मिलने को तैयार है। स्पष्ट किया था कि आरडीजी हिमाचल का हक है। आरडीजी यदि एक बार बंद हो गई तो इसे दोबारा बहाल नहीं करवाया जा सकेगा और इसका असर प्रदेश के हर क्षेत्र के विकास पर पड़ेगा।
विधि विभाग को भेजे दोनों संशोधन विधेयक
विधानसभा सचिवालय ने नगर निगम में महापौर व उपमहापौर का कार्यकाल पांच साल करने और मुख्य न्यायाधीश की जगह मुख्य सचिव को रेरा चयन समिति के अध्यक्ष नियुक्त करने से जुड़े पारित दोनों संशोधन विधेयक विधि विभाग को भेज दिए हैं। विधि विभाग से दोनों संशोधन विधेयक राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त करने के लिए लोकभवन भेजे जाएंगे।
राज्यपाल ने लौटाई थी फाइल
इससे पहले राज्यपाल ने महापौर व उपमहापौर के कार्यकाल को लेकर कुछ सुझावों के साथ फाइल सरकार को लौटाई थी। इसी तरह से रेरा में नियुक्ति को लेकर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली कमेटी में मुख्य सचिव को नामित करने पर सुझाव दिए थे। सरकार ने दोनों मामलों में संशोधन विधेयक लाकर सदन में पारित किए।
