अरावली क्षेत्र में प्रस्तावित महत्वाकांक्षी जंगल सफारी प्रोजेक्ट पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक के बाद हरियाणा सरकार अब कानूनी मोर्चे पर सक्रिय हो गई है। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह जल्द ही सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी।
सरकार का कहना है कि प्रस्तावित परियोजना से अरावली वन क्षेत्र को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी वैधानिक मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने बताया कि विशेषज्ञों से विस्तृत परामर्श के बाद याचिका तैयार की जा रही है और इसे अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में दायर कर दिया जाएगा।
मंत्री ने दोहराया कि अरावली संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और उसी आधार पर परियोजना की रूपरेखा तैयार की गई है। उनका कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए इस परियोजना को आगे बढ़ाने की योजना है।
10 हजार एकड़ में प्रस्तावित है विश्वस्तरीय जंगल सफारी
प्रदेश सरकार की योजना के अनुसार गुरुग्राम और नूंह जिलों में अरावली से सटे 10 गांवों की लगभग 10 हजार एकड़ भूमि पर विश्वस्तरीय जंगल सफारी पार्क विकसित किया जाना प्रस्तावित है। पहले चरण में करीब 2500 एकड़ क्षेत्र में कार्य शुरू करने की तैयारी थी। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का विरोध, सुप्रीम कोर्ट की रोक
अरावली संरक्षण से जुड़े पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस परियोजना पर गंभीर आपत्तियां उठाते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचाया था। 12 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने परियोजना पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब तक विशेषज्ञ अरावली की स्पष्ट और वैज्ञानिक परिभाषा तय नहीं करते, तब तक इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गतिविधि या हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
सरकार का कहना है कि पुनर्विचार याचिका में सभी पर्यावरणीय, कानूनी और तकनीकी तथ्यों को विस्तार से रखा जाएगा। मंत्री ने उम्मीद जताई कि अदालत तथ्यों पर विचार करते हुए राज्य सरकार को परियोजना आगे बढ़ाने की अनुमति दे सकती है।
जंगल सफारी प्रोजेक्ट को लेकर प्रदेश में सियासी और पर्यावरणीय बहस तेज हो चुकी है। विकास बनाम संरक्षण की इस बहस के बीच अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भविष्य तय करेगी।
