प्रयागराज। प्रयागराज-झांसी खंड से स्नातक सटी पर सपा के डॉ. मान सिंह यादव एमएलसी के लिए चुने गए हैं। मान सिंह ने भाजपा उम्मदवार को हराया है। मान सिंह का राजनीति सफर बड़ा ही दिलचस्प रहा है। 20 साल पहले मान सिंह यादव ने शिक्षक भर्ती आंदोलन की संभाल और यहीं से राजनीति में कदम रख दिया। युवाओं के बीच से निकली एक आवाज ने मान सिंह यादव को आज विधान परिषद तक पहुंचा दिया। शिक्षक भर्ती आंदोलन और अभ्यर्थियों की लड़ाई लड़ने वाले डॉ. मान सिंह यादव सदन में शिक्षकों, बेरोजगारों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों की आवाज बन गए।
2006-07 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से प्रभावित होकर डॉ. मान सिंह यादव ने एक बेरोजगार के तौर पर राजनीति में कदम रखा। उसी समय माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के सामने चल रहे शिक्षक भर्ती आंदोलन का डॉ. यादव हिस्सा बने। उस आंदोलन में इतना लोकप्रिय हुए कि उनको संघर्ष समिति के अध्यक्ष बना दिया गया। यह भी एक संयोग रहा कि जिस भर्ती के लिए आंदोलन किया, उसी प्रक्रिया के तहत बाद में शिक्षक भी बने।
पेशे से शिक्षक हैं मान सिंह यादव
समाजवादी पार्टी से जुड़े डॉ. मान सिंह यादव इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार दूसरी बार विधान परिषद सदस्य बने, डॉ. यादव ने दो बार पार्टी की शिक्षक सभा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली और वर्तमान में इसके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। पेशे से शिक्षक डॉ. मान सिंह यादव पब्लिक इंटर कॉलेज, मनौरी में कार्यरत हैं। उन्होंने बीएड, एमएड, नेट और पीएचडी किया है। उनकी पत्नी डॉ. प्रभा यादव भी इसी कॉलेज में अध्यापक हैं। प्रीतमनगर में रहने वाले डॉ. मान सिंह यादव के एक बेटा और एक बेटी है। विधान परिषद में उनकी प्रमुख लड़ाइयों में पुरानी पेंशन की बहाली, 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण के मानकों का पालन, वित्तविहीन शिक्षकों के लिए सम्मानजनक मानदेय और शिक्षामित्रों के लिए समान कार्य-समान वेतन का मुद्दा प्रमुख रहा है।
यज्ञदत्त को हराकर 24 साल बाद तोड़ा था भाजपा का वर्चस्व
इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में वर्ष 2020 का चुनाव डॉ. मान सिंह यादव के राजनीतिक सफर का निर्णायक मोड़ बना। डॉ. यादव ने इस सीट से भाजपा के लगातार चार बार जीते डॉ. यज्ञदत्त शर्मा को हराकर करीब 24 साल से चले आ रहे पार्टी के वर्चस्व को समाप्त कर दिया था। छह साल पहले हुए चुनाव में मुकाबला इतना दिलचस्प था कि पहली वरीयता के मतों की गिनती में कोई प्रत्याशी जीत का निर्धारित कोटा हासिल नहीं कर सका। इसके बाद दूसरी वरीयता के मतों की गणना हुई और लंबी मतगणना के बाद डॉ. मान सिंह यादव 23,093 मतों के साथ विजयी घोषित किए गए।
किसे कितने मिले वोट
भाजपा के डॉ. शर्मा को 18,760 मत मिले। इस तरह सपा प्रत्याशी ने 4,333 मतों से जीत दर्ज कर पहली बार विधान परिषद में जगह बनाई। छह साल बाद 2026 में डॉ. यादव ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल कर सीट पर सपा का प्रतिनिधित्व बरकरार रखा। इस बार डॉ. यादव ने भाजपा के अशोक कुमार राठौर को 27,663 मतों से हराया। वर्ष 2020 में भाजपा का पुराना वर्चस्व तोड़ने वाले डॉ. यादव ने 2026 में जीत का अंतर भी छह गुना से अधिक बढ़ा दिया। डॉ. यादव को 60,358 और राठौर को 32,695 वोट मिले। कुल 1,09,482 मतपत्रों की गिनती हुई, जिनमें 9,596 निरस्त घोषित किए गए।
