शिमला। हिमाचल में वाहन परमिट लेना अब महंगा होगा। राज्य सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के वाहनों के परमिट शुल्क में बढ़ोतरी कर दी है। प्रस्तावित संशोधन के तहत बसों, टैक्सियों, ऑटो रिक्शा, मालवाहक वाहनों, जीप और अन्य यात्री वाहनों के परमिट जारी करने, नवीनीकरण के लिए नई शुल्क दरें निर्धारित की गई हैं। सरकार ने बढ़ोतरी के साथ एक और बड़ा बदलाव किया है। भविष्य में इन शुल्कों में हर दो वर्ष बाद स्वतः 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।
यानी इसके लिए विभाग को प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। हर दो साल बाद विभाग स्वत: ही इसकी बढ़ोतरी करने के लिए अधिकृत होगा।
अधिसूचना जारी, सुझाव मांगे
अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आरडी नजीम की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। विभाग ने 30 दिनों के भीतर आम जनता, परिवहन संचालकों, टैक्सी यूनियनों, बस ऑपरेटरों और अन्य हितधारकों से सुझाव व आपत्तियां मांगी है। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद ही नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
परिवहन विभाग ने कैबिनेट को जो प्रस्ताव भेजा था उसमें न्यूनतम दर 1 हजार करने की मांग की थी। कैबिनेट ने इसे अस्वीकार कर दिया था। वर्ष 1999 के बाद यह बढ़ोतरी की गई है।
- वाहन का प्रकार, अस्थायी, नियमित
- बसें, 750, 1500
- मोटर कैब और ऑटो रिक्शा, 50, 50
- मैक्सी कैब, एलएमवी मालवाहक 100, 200
- मध्यम और हैवी गुड्स वाहन 100, 100
- जीप और अन्य यात्री वाहन 100, 100
- स्टेज कैरिज व अन्य वाहन 500, 1000
विशेष परमिट भी होंगे महंगे
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 88(8) के तहत जारी किए जाने वाले विशेष परमिटों के लिए भी शुल्क तय किया गया है। इसके तहत अस्थायी विशेष परमिट के लिए 250 रुपये और नियमित विशेष परमिट के लिए 500 रुपये शुल्क प्रस्तावित है। अन्य श्रेणी में 20 से 50 रुपये तक की बढ़ोतरी की है।
ऑनलाइन भुगतान को भी बढ़ावा
नए नियमों के तहत परमिट के लिए आवेदन करते समय शुल्क का भुगतान नकद रसीद, ऑनलाइन भुगतान व ट्रेजरी चालान के माध्यम से किया जा सकेगा। इसके अलावा क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) को आवेदन शुल्क प्राप्त होने पर निर्धारित प्रारूप में अलग रसीद जारी करनी होगी, ताकि भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सके।
