देहरादून: प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिए जाने को लेकर ईवी पॉलिसी, परिवहन और उद्योग विभाग की ओर से इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी का प्रारूप तैयार किया गया है. मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान ईवी पॉलिसी पर चर्चा की गयी.
उत्तराखंड में नए सिरे से तैयार होगी की ईवी पॉलिसी: उत्तराखंड में तैयार की गई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी में सब्सिडी संबंधित तमाम प्रावधान किए गए हैं, जिसके चलते धामी मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान परिवहन मंत्री ने निर्देश दिए कि अन्य राज्यों में चल रहे इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के प्रावधानों का अध्ययन किया जाए. फिर उन राज्यों में किए गए बेहतर प्रावधानों के अनुरूप ही प्रदेश में नए सिरे से ईवी पॉलिसी तैयार की जाए.
अब तक क्या-क्या हुआ: दरअसल इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिए जाने को लेकर सेतु आयोग में परिवहन विभाग के साथ मिलकर ईवी पॉलिसी का प्रारूप तैयार किया था. लेकिन फिर शासन स्तर से निर्णय हुआ कि ईवी पॉलिसी को उद्योग विभाग के स्तर से तैयार किया जाना चाहिए. इस पर काम शुरू ही हुआ था कि फिर शासन ने इस बात पर जोर दिया कि परिवहन विभाग और उद्योग विभाग की अलग-अलग अब पॉलिसी ना बने, बल्कि उद्योग विभाग जो पॉलिसी अपने स्तर से बना रहा है, उसमें परिवहन विभाग के इनपुट को भी शामिल किया जाए. इसके बाद उद्योग विभाग की ओर से इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी का प्रारूप तैयार कर लिया गया.
अन्य राज्यों की नीतियों के प्रावधानों का होगा अध्ययन: मुख्यमंत्री के अपर सचिव ने बताया कि-
जो इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी तैयार की गई है, उसमें भारी भरकम छूट और सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान प्रस्तावित था. जिसमें मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर, वाहन रजिस्ट्रेशन शुल्क और रोड टैक्स में शत- प्रतिशत छूट का प्रावधान प्रस्तावित था. इसके अलावा, चार्जिंग स्टेशन के लिए स्थाई पूंजी निवेश पर मैदानी क्षेत्रों में 80 फ़ीसदी और पर्वतीय क्षेत्रों में 90 फीसदी सब्सिडी का प्रावधान प्रस्तावित था. ऐसे में कैबिनेट बैठक के दौरान उत्तराखंड ईवी पॉलिसी में प्रस्तावित प्रावधानों पर चर्चा की गई. साथ ही निर्णय लिया गया कि देश के अन्य राज्यों में जो ईवी पॉलिसी बनी हुई है, उसके प्रावधानों का अध्ययन किया जाए, ताकि उत्तराखंड राज्य में और बेहतर इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी तैयार किया जा सके.
-बंसीधर तिवारी, अपर सचिव, मुख्यमंत्री-
लास्ट माइल लॉजिस्टिक पर विशेष जोर: उत्तराखंड इलेक्ट्रिक वाहन नीति, प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिए जाने के लिए तैयार की गई थी. इस नीति का उद्देश्य, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, चार्जिंग स्टेशन का विस्तार और इलेक्ट्रिक वाहन के क्षेत्र में रिसर्च, डिजाइन, नवाचार, शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देना शामिल था. इसके साथ ही सभी श्रेणी के वाहन क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने को बढ़ावा देकर, उत्तराखण्ड को भारत के सबसे अधिक ईवी अनुकूल पर्वतीय राज्य के रूप में स्थापित करना था. दोपहिया, पब्लिक परिवहन, कमर्शियल चौपहिया वाहन और अंतिम-मील लॉजिस्टिक्स (Last-Mile Logistics) जैसे बड़े बाजार श्रेणियों पर विशेष ध्यान देना था.
तीर्थयात्रा मार्गों और राष्ट्रीय उद्यानों आदि में ईवी के उपयोग के लिए योजना: इसके अलावा, ऑटोमोटिव क्षेत्र की ओर से सृजित मौजूदा रोजगार को सुरक्षित रखने और बढ़ाने के लिए ईवी निर्माण बैटरी उत्पादन, चार्जिंग बुनियादी ढांचे और संबंधित उद्योगो में निवेश बढ़ाना करना था. ईवी असेंबली, मरम्मत और रखरखाव, बैटरी रिसाइक्लिंग, चार्जिंग, बुनियादी ढांचे, डिजाइन और नवाचार में कुशल कार्यबल विकसित करना था. जीवाश्म ईंधन पर राज्य की निर्भरता को कम करना, वायु गुणवत्ता (AQI) में सुधार करना और 2070 तक भारत के कार्बन-न्यूट्रल लक्ष्य में योगदान देना था. पर्यटन स्थलों, तीर्थयात्रा मार्गों और राष्ट्रीय उद्यानों आदि में ईवी के उपयोग के जरिए उत्तराखण्ड में पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़वा देने के लिए ईवी का लाभ उठाना था.
ईवी पॉलिसी में छूट और सब्सिडी का ये था संभावित प्रावधान
• इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर “पहले आओ- पहले पाओ” के आधार पर प्रोत्साहन दिया जाएगा
• इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर वाहन रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100 फ़ीसदी की छूट मिलने की संभावना है
• इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर रोड टैक्स में 100 फ़ीसदी की छूट मिलने की संभावना है
• मैदानी क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशन के लिए स्थायी पूंजी निवेश का 80 फ़ीसदी तक प्रोत्साहन संभावित है
• पर्वतीय क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशन के लिए स्थायी पूंजी निवेश का 90 फ़ीसदी तक प्रोत्साहन संभावित है
• 14 किलोवाट से अधिक पावर के पहले 200 चार्जिंग प्लग के लिए प्रति प्लग पर अधिकतम 10 लाख रुपए तक का प्रोत्साहन संभावित है
• 120 किलोवाट से अधिक पावर के पहले 20 चार्जिंग प्लग के लिए प्रति प्लग पर अधिकतम 25 लाख रुपए तक का प्रोत्साहन संभावित है
