
केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माता और निर्देशक रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर ऐसे दावों को ऐतिहासिक सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं कर सकते, जिनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उनका कहना है कि पंजाब का इतिहास बेहद संवेदनशील है और इसे किसी एक विचारधारा या पक्ष के अनुसार पेश करना उचित नहीं है।बिट्टू ने फिल्म निर्माताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे उन सभी दस्तावेजी साक्ष्यों, सरकारी रिकॉर्ड, न्यायिक निष्कर्षों और प्रमाणित आंकड़ों को सार्वजनिक करें, जिनके आधार पर फिल्म में 25 हजार लोगों के लापता होने या अवैध रूप से अंतिम संस्कार किए जाने का दावा किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे दावों के समर्थन में ठोस प्रमाण नहीं हैं तो निर्माताओं को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना चाहिए कि यह संख्या आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि यह आंकड़ा केवल अनुमान या आरोपों पर आधारित है, तो इसे फिल्म में निर्विवाद ऐतिहासिक तथ्य की तरह क्यों प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि दर्शकों को यह क्यों नहीं बताया गया कि इस संख्या पर कोई अंतिम न्यायिक फैसला या आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे विषयों पर फिल्म बनाते समय तथ्यों और जिम्मेदारी का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
रवनीत सिंह बिट्टू ने यह भी आरोप लगाया कि फिल्म में पंजाब में आतंकवाद के दौर को एकतरफा तरीके से दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के दौरान मारे गए निर्दोष नागरिकों, हिंदुओं, बस यात्रियों, दुकानदारों, सरकारी कर्मचारियों और मजदूरों की पीड़ा को भी उसी गंभीरता से दिखाया जाना चाहिए था। उनका कहना है कि इतिहास का संतुलित और निष्पक्ष चित्रण ही समाज के हित में होता है।उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि फिल्म निर्माता अपने दावों को प्रमाणित नहीं कर पाते हैं, तो वह इस मामले में उपलब्ध संवैधानिक और कानूनी विकल्पों पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी फिल्म के माध्यम से अपुष्ट तथ्यों को स्थापित इतिहास के रूप में पेश करना उचित नहीं माना जा सकता। वहीं भाजपा नेता और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के पूर्व अधिकारी एस.एस. लालपुरा ने बिट्टू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सभी को अपनी सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जसवंत खालरा ने अपने समय में 25 हजार लोगों के कथित लापता होने का मुद्दा उठाया था, जिसे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी गंभीरता से लिया था। लालपुरा ने कहा कि यदि केंद्रीय मंत्री को इस मामले से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों की जानकारी चाहिए तो वे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से संबंधित रिकॉर्ड प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार का भ्रम या विवाद पैदा न हो।
