देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले तीन छात्रों- रोनिक बिस्वास, मानव दास और कशिश चौहान को उच्च शिक्षा और नई स्किल सीखने के दो अलग-अलग अवसरों के लिए स्कॉलरशिप मिली है।
रोनिक बिस्वास और मानव दास को प्लाक्षा यूनिवर्सिटी के यंग टेक्नोलॉजी स्कॉलर्स प्रोग्राम के रोबोटिक्स ट्रैक के लिए शत प्रतिशत स्कॉलरशिप मिली है, जबकि कशिश चौहान को हिमाचल प्रदेश की इटरनल यूनिवर्सिटी में नवगुरुकुल के रेजिडेंशियल बीसीए प्रोग्राम के लिए 90 प्रतिशत स्कॉलरशिप मिली है।
वाईटीएस कक्षा नौ से 12 तक के हाई स्कूल छात्रों के लिए दो हफ्ते का रेसिडेंशियल समर प्रोग्राम है। यह उन छात्रों के लिए है, जो टेक्नोलॉजी और उसके असल जिंदगी में इस्तेमाल को समझना चाहते हैं।
इसमें रोबोटिक्स, डेटा साइंस और बायोलॉजी टेक्नोलॉजी जैसे नए क्षेत्रों को प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स के जरिए समझने का मौका मिलता है। छात्र फैकल्टी और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से मार्गदर्शन लेते हैं और कैंपस में साथ रहकर अलग-अलग विषयों को जोड़कर सीखते हैं।
वाईटीएस में छात्र सिर्फ पढ़ते नहीं, बल्कि खुद काम करके सीखते हैं, नए आइडिया आजमाते हैं और एक्सपर्ट मेंटर्स की मदद से अलग-अलग समस्याओं का समाधान ढूँढते हैं।
खास तौर पर रोबोटिक्स ट्रैक में छात्र सीखते हैं कि मशीन, प्रोग्रामिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स को एक साथ कैसे इस्तेमाल कर असल जिंदगी की समस्याओं के समाधान तैयार किए जा सकते हैं। इसमें प्रयोग करने, प्रोटोटाइप तैयार करने और प्रैक्टिकल तरीके से सीखने पर खास ध्यान दिया जाता है।
नवगुरुकुल हिमाचल प्रदेश की इटरनल यूनिवर्सिटी में ती न साल का रेसिडेंशियल, यूजीसी से मान्यता प्राप्त बीसीए डिग्री प्रोग्राम संचालित करता है। इसमें प्रैक्टिकल टेक्नोलॉजी स्किल्स, साथियों के साथ मिलकर सीखने, इंटर्नशिप और करियर की तैयारी पर खास ध्यान दिया जाता है।
स्कॉलरशिप के तहत चुने गए छात्रों को कोर्स फीस, रहने की सुविधा, खाना, लैपटॉप, पढ़ाई से जुड़ी सामग्री, मेंटरशिप और प्लेसमेंट में मदद का पूरा खर्च कवर किया जाता है।
यह अवसर 16.5 साल या उससे अधिक उम्र की उन छात्राओं के लिए है, जिन्होंने किसी भी स्ट्रीम से कक्षा 12वीं पास की है और जिनके परिवार की सालाना आय पांच लाख रुपए से कम है।
इन छात्रों का चयन कौशलम में उनकी भागीदारी के बाद हुआ। कौशलम उत्तराखंड सरकार की एक उद्यमिता पहल है, जिसे उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के साथ मिलकर चलाया गया।
इसके जरिए स्कूल के छात्रों को प्रैक्टिकल गतिविधियों के माध्यम से समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने, नई सोच विकसित करने और शुरुआत से ही इनोवेशन की समझ बनाने का मौका दिया गया। माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद प्रसाद सिमल्टी ने पुष्टि कर कहा कि यह उत्तराखंड की स्कूल शिक्षा के लिए बेहतर दिशा का प्रमाण है।
