उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। फेसबुक पर ‘टाटा बाय-बाय’ लिखकर सियासी हलचल बढ़ाने वाले आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने बुधवार को भाजपा छोड़ने का ऐलान कर दिया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़ दी है। अब वह समर्थकों के साथ बड़ी बैठक करेंगे और उनकी राय के आधार पर आगे की राजनीतिक राह तय करेंगे। हालांकि, उन्होंने फिलहाल किसी दूसरे दल में जाने का ऐलान नहीं किया है।
धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा से नाराजगी की वजह बताते हुए वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘2024 में जब मैंने चुनाव लड़ा और जिन लोगों ने मेरी खुलकर खिलाफत की, वो अगर पार्टी में बड़े पद पर बैठें तो कष्ट तो होगा। ऐसे लोगों पर पार्टी कोई एक्शन नहीं लेगी तो हम जैसे लोगों का टाटा बाय-बाय कहना स्वाभाविक है।’ हालांकि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया। भाजपा छोड़ने के ऐलान के साथ ही धर्मेंद्र कश्यप ने अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं की। उन्होंने कहा कि पहले समर्थकों के साथ बड़ी बैठक होगी। इसमें सभी की राय सुनी जाएगी और उसके बाद आगे की रणनीति तय होगी। समर्थक जैसा कहेंगे, उसी के मुताबिक वह निर्णय लेंगे।
राज्यसभा प्रत्याशियों की सूची के बाद शुरू हुआ था घटनाक्रम
सोमवार शाम भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी की थी। इसके बाद मंगलवार शाम करीब पांच बजे धर्मेंद्र कश्यप ने फेसबुक पर सिर्फ ‘टाटा बाय-बाय’ लिखा। पोस्ट में न भाजपा का नाम था और न ही पार्टी छोड़ने की स्पष्ट घोषणा। हालांकि इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। उनकी पोस्ट को राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने से जोड़कर भी देखा गया, हालांकि बुधवार को अपनी नाराजगी बताते हुए उन्होंने मुख्य रूप से 2024 के लोकसभा चुनाव में विरोध करने वालों को संगठन में पद मिलने का मुद्दा उठाया।
बसपा से सपा और फिर भाजपा का सफर
धर्मेंद्र कश्यप आंवला लोकसभा सीट से वर्ष 2014 और 2019 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। इससे पहले वह बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे। वर्ष 2002 में उन्होंने बसपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता, जबकि 2007 में सपा के टिकट पर विधायक बने। मुलायम सिंह यादव सरकार में वह सपा कोटे से दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री भी रहे। इसके बाद वर्ष 2013 के आखिर में वह भाजपा में शामिल हुए।
धर्मेंद्र ने बेटी को कहीं से भी टिकट दिलाने का किया दावा
धर्मेंद्र कश्यप अपनी बेटी कीर्ति कश्यप को भी सक्रिय राजनीति में लाने की तैयारी में हैं। इसके लिए बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से तैयारी शुरू कर दी गई है। उन्होंने दावा किया कि वह जहां से चाहेंगे, वहां से उनकी बेटी को टिकट मिलेगा। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि टिकट किस राजनीतिक दल से होगा। मालूम हो कि धर्मेंद्र कश्यप ओबीसी बिरादरी से आते हैं और रुहेलखंड मंडल की सीटों पर ओबीसी बिरादरी का काफी दबदबा है।
सियासी गलियारों में दबाव की राजनीति बनाने की चर्चा
धर्मेंद्र कश्यप के इस कदम को पार्टी का एक धड़ा दबाव की राजनीति बता रहा है। उनका कहना है कि जाने से पहले इतना ढोल पीटना कई तरह के इशारे कर रहा है। कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि समर्थकों के साथ बैठक कर धर्मेंद्र कश्यप अपना दम दिखाने की तैयारी में भी हैं। वहीं धर्मेंद्र कश्यप के इस कदम के संबंध में आंवला के जिलाध्यक्ष आदेश प्रताप सिंह का कहना है कि वह पार्टी के बड़े नेता हैं। यदि किसी बात को लेकर उनमें नाराजगी है तो उसे जल्द ही मिलकर दूर करने की कोशिश करेंगे।
