देहरादून। उत्तराखंड में नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए सरकार अब सप्लाई चेन तोड़ने से लेकर उपचार और जागरूकता तक बहुस्तरीय रणनीति अपनाने की दिशा में आगे कदम बढ़ा रही है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने पकड़े गए मादक पदार्थों के मामलों की लगातार निगरानी करने, तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने और निष्क्रिय नशामुक्ति केंद्रों को शीघ्र संचालित करने के निर्देश दिए हैं।
सचिवालय में गुरुवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय नेशनल कोआर्डिनेशन सेंटर फार ड्रग ला एनफोर्समेंट (एनकार्ड) की बैठक हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि जनपद स्तरीय एनकार्ड बैठकें तय समय पर नियमित रूप से आयोजित हों और मादक पदार्थों से जुड़े मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने नशामुक्त किट के लिए मानक तय करने पर जोर देते हुए स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग को सभी निष्क्रिय नशा मुक्ति केंद्रों की समस्याएं दूर कर उन्हें जल्द चालू करने को कहा।
उन्होंने जिला अस्पतालों में नशामुक्ति केंद्रों के लिए समर्पित बेड आरक्षित करने तथा सभी मेडिकल कालेजों और उप जिला अस्पतालों में भी ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने में धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निजी नशामुक्ति केंद्रों का निरीक्षण कर मानकों के अनुरूप उनके पंजीकरण और प्रमाणन को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
इसके साथ ही स्कूली बच्चों और युवाओं में नशे के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाने, सभी शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग क्लब गठित करने तथा स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में गुटखा, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए।
उन्होंने प्रदेश में मादक पदार्थों के उपयोग की वास्तविक स्थिति जानने के लिए व्यापक सर्वे कराने की आवश्यकता भी बताई, ताकि नशे के नेटवर्क को जड़ से समाप्त करने की प्रभावी रणनीति बनाई जा सके।
बैठक में डीजी इंटेलीजेंस अभिनव कुमार, सचिव शैलेश बगौली, आईजी डॉ. नीलेश आनंद भरणे, अपर सचिव गृह तृप्ति भट्ट, एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उपस्थित रहे।
