राम मंदिर दान चोरी को लेकर छिड़े विवाद के बाद अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अब सीईओ की नियुक्ति करने जा रहा है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने शुक्रवार को नई दिल्ली में बैठक कर पात्रता के मानक तय कर दिए। इच्छुक अभ्यर्थी 18 जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे। तय मानकों के अनुसार सीईओ पद के लिए अभ्यर्थी का स्नातक होना जरूरी है। उसके पास प्रशासन या वित्तीय प्रबंधन क्षेत्र में कम से कम 20 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। मंदिर प्रबंधन का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा अभ्यर्थी का हिंदू धर्म का अनुयायी होना भी अनिवार्य शर्त है। प्रारंभिक रूप से नियुक्ति तीन वर्ष के लिए होगी।
श्रीराममंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं अनुशासित बनाने की दिशा में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज कर दी है। माना जा रहा है कि 22 जुलाई को होने वाली बैठक में सीईओ की घोषणा भी कर दी जाएगी। तीन सदस्यीय समिति योग्य उम्मीदवारों की तलाश में जुटी है। समिति के सदस्य रिटायर न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े ने यह जिम्मेदारी संभाली है। विशेष ईमेल आईडी भी बनाई जा रही है, जिस पर आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।
अयोध्या में ही रहना होगा
आवेदन प्राप्त होने के बाद समिति चयनित उम्मीदवारों से बातचीत करेगी। इसके बाद अंतिम चयन किया जाएगा। चयनित अधिकारी को कार्यकाल के दौरान अयोध्या में रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभानी होंगी। चयन प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए समिति एक सचिव की भी नियुक्ति करेगी।
काम सही तो बढ़ेगा कार्यकाल, जरूरत पर हटा दिया जाएगा
सूत्रों का कहना है कि अगले एक महीने के भीतर पूरी चयन प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। सूत्रों की मानें तो नियुक्ति प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष के लिए होगी। कार्य प्रदर्शन संतोषजनक रहने पर कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है, जबकि आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट के पास अधिकारी को पद से हटाने का अधिकार भी होगा।
ट्रस्ट देगा वेतन, आवास और अन्य सुविधाएं
अधिकारी को वेतन, आवास और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध कराई जाएंगी। एक तरह से यह वेतनभोगी कर्मचारी पूरी तरह मंदिर के लिए ही समर्पित रहेगा। बताया जा रहा है कि वह तीर्थ क्षेत्र से वेतन प्राप्त करने वाला यह सीईओ पूरी तरह से न्यास के अधीन होगा। वह न्यास के प्रति उत्तरदायी होगा।
