लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि फॉरेंसिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता ही अपराधियों को सजा दिलाने और निर्दोष लोगों को न्याय दिलाने का मजबूत आधार है. उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के जरिए नियुक्त हुए वैज्ञानिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे हर फॉरेंसिक साक्ष्य की जांच पूरी शुद्धता, ईमानदारी और समयबद्धता के साथ करें. उन्होंने कहा कि जिस निष्पक्षता और न्याय की उम्मीद इन अधिकारियों ने अपनी नियुक्ति प्रक्रिया में की थी, उसी भावना के साथ उन्हें पीड़ितों को न्याय दिलाने में अपनी भूमिका निभानी होगी. अपराधी कोई भी हो, उसे कानून से बचने का मौका नहीं मिलना चाहिए और निर्दोष लोगों के सम्मान व अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित होनी चाहिए.
28 वैज्ञानिक अधिकारियों को मिले नियुक्ति पत्र: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से चयनित 28 वैज्ञानिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए. इस मौके पर उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं मिलता, बल्कि इससे पूरे परिवार की खुशियां जुड़ी होती हैं. इन अधिकारियों का चयन शासन की शुचिता और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का उदाहरण है. उन्होंने बताया कि अभ्यर्थियों ने उन्हें जानकारी दी कि उनका साक्षात्कार हुआ और उसी दिन शाम तक परिणाम भी घोषित कर दिया गया.
योग्यता और मेरिट के आधार पर हुआ चयन: सीएम योगी ने कहा कि चयन प्रक्रिया में न किसी सिफारिश की जरूरत पड़ी, न लेनदेन हुआ और न ही किसी अनुचित तरीके का सहारा लेना पड़ा. सभी अभ्यर्थियों का चयन उनकी योग्यता और मेरिट के आधार पर हुआ है. अब नवनियुक्त वैज्ञानिक अधिकारियों से भी यही अपेक्षा है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से करें. उनके काम की गुणवत्ता का सीधा असर अपराध की जांच और पीड़ितों को मिलने वाले न्याय पर पड़ेगा.
पुलिस भर्ती में पारदर्शिता से बदली यूपी की पहचान: मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस में 2.30 लाख से अधिक कार्मिकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और शुचिता के साथ पूरी की गई है. आज उत्तर प्रदेश पुलिस दुनिया की सबसे बड़ी सिविल पुलिस के रूप में स्थापित है. उन्होंने कहा कि एक समय प्रदेश में अराजकता, उपद्रव और कर्फ्यू आम बात थी. अपराधियों के मन में कानून का डर नहीं था और उन्हें लगता था कि वे आसानी से कानून के शिकंजे से बच निकलेंगे.
कानून-व्यवस्था में सुधार का किया जिक्र: सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक सुधार किए हैं, जिसका असर अब दिखाई दे रहा है. आज देश में कानून-व्यवस्था की चर्चा होती है तो उत्तर प्रदेश का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. उन्होंने कहा कि मजबूत पुलिस व्यवस्था के साथ वैज्ञानिक जांच भी न्याय प्रक्रिया का अहम हिस्सा है. फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका अपराधियों को सजा दिलाने और निर्दोष लोगों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण है.
वैज्ञानिक साक्ष्य अपराध की गुत्थी सुलझाने में होंगे निर्णायक: मुख्यमंत्री ने सहारनपुर में एक बालिका के जले हुए अवशेषों से मिले साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक अपराधी तक पहुंचने का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि रक्त के नमूने, उंगलियों के निशान, बाल और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य अपराध की गुत्थी सुलझाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. फॉरेंसिक विशेषज्ञ न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण सारथी हैं. जब पुलिस किसी मामले की जांच को आगे बढ़ाती है, तब वैज्ञानिक अधिकारियों को साक्ष्यों के आधार पर जांच को मजबूत करना होता है.
समय पर जांच से न्यायिक प्रक्रिया होगी तेज: सीएम योगी ने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्यों की मदद से अपराधियों को सजा दिलाने में आसानी होगी और न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी भी कम होगी. इसके लिए जरूरी है कि हर साक्ष्य की जांच पूरी सावधानी और तय समयसीमा में की जाए. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उनकी रिपोर्ट निष्पक्ष और भरोसेमंद होनी चाहिए. किसी भी स्तर पर लापरवाही या पक्षपात से न्याय प्रक्रिया प्रभावित नहीं होनी चाहिए.
भू-माफिया से मुक्त कराई जमीन पर बना फॉरेंसिक संस्थान: मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की स्थापना का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले जिस जमीन पर भू-माफिया का कब्जा था, उसे मुक्त कराकर वहां यह महत्वपूर्ण संस्थान स्थापित किया गया. आज यह संस्थान प्रदेश में वैज्ञानिक जांच और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने का केंद्र बन रहा है. यहां फॉरेंसिक साइंस के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक विधाओं के प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की गई है. संस्थान में डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं.
क्वांटम फॉरेंसिक जैसे नए क्षेत्रों पर जोर: सीएम योगी ने कहा कि बदलती तकनीक के साथ फॉरेंसिक जांच के तरीकों को भी आधुनिक बनाना जरूरी है. क्वांटम फॉरेंसिक जैसे नए क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करना समय की जरूरत है. आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मदद से अपराध की जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है. इससे प्रदेश की न्याय व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी.
हर जिले में दो-दो फॉरेंसिक मोबाइल वैन की व्यवस्था: मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वैज्ञानिक जांच की क्षमता बढ़ाने के लिए नई विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं. प्रत्येक जिले में दो-दो फॉरेंसिक मोबाइल वैन उपलब्ध कराई गई हैं. इनकी मदद से घटनास्थल पर समय से पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने की व्यवस्था मजबूत की जा रही है. इसके लिए पर्याप्त मानव संसाधन और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने पर भी काम किया जा रहा है.
नवनियुक्त अधिकारियों से ईमानदारी से काम करने की अपील: सीएम योगी ने नवनियुक्त वैज्ञानिक अधिकारियों से कहा कि सरकार जिस उद्देश्य से फॉरेंसिक जांच का आधारभूत ढांचा तैयार कर रही है, उसकी सफलता उनकी ईमानदारी और कार्यकुशलता पर निर्भर करेगी. उन्हें हर मामले में निष्पक्ष रहकर साक्ष्यों की जांच करनी होगी. उनका दायित्व है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज भी शासन तक पहुंचे और उसे न्याय मिल सके. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारी को पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ निभाने की अपेक्षा की.
