चंडीगढ़। हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल लगातार 21वें दिन भी जारी है। प्रदेश के कई शहरों में सफाई कर्मचारी धरने पर बैठे हैं। हालांकि, जैसे-जैसे सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के दिन बढ़ते जा रहे हैं, वैसे-वैसे उनके तेवर भी उग्र हो रहे हैं।
बीते मंगलवार (25 अगस्त, 2026) को प्रदेश में कई जगहों पर विरोध उग्र हो गया था। ऐसे में आइए जानते हैं आखिर हरियाणा में सफाई कर्मचारी हड़ताल पर क्यों बैठे हैं, उनकी क्या प्रमुख मांगें हैं और मंगलवार को अचानक विरोध उग्र क्यों हो गया? साथ ही यह भी जानेंगे कि इस हड़ताल की वजह से आम लोगों पर क्या असर पड़ रहा है।
क्या है सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांगे?
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने सफाई कर्मचारियों के हड़ताल का पुरजोर समर्थन किया। साथ ही बताया कि उनकी प्रमुख मांगे क्या-क्या हैं।
लांबा ने कहा कि 13 मई को पालिका रोल पर लगे अनुबंध एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को पक्का करना, ठेका प्रथा समाप्त करना, खाली पदों पर पक्की भर्ती करना और सफाई एवं सीवर कर्मचारियों की पक्की भर्ती करना है।
क्यों भड़के सफाई कर्मचारी?
हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से प्रदेश के शहरों में जगह-जगह कचरा जमा हो गया है, जिसकी वजह से बदबू के साथ मच्छर-मक्खियों की समस्या तो बढ़ी ही है साथ ही मानसून के सीजन में बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। इसी वजह से प्रशासन अब कचरा उठाने का प्रयास कर रहा है और प्रशासन के इस कदम से कर्मचारी नाराज हो गए हैं।
मंगलवार को कचरा उठाने की प्रशासनिक कोशिशों के विरोध में कई शहरों में हड़ताली कर्मचारियों के तेवर उग्र हो गए। सिरसा में कचरा उठाने पहुंचे लोडर पर कर्मचारी चढ़ गए और ट्रैक्टर-ट्राली के टायरों की हवा निकाल दी। डोर-टू-डोर कचरा उठाने वाले वाहनों के शीशे तोड़ने के साथ बस स्टैंड पर एजेंसी कर्मचारियों से झाड़ू और रेहड़ियां छीनने की घटना भी हुई। पुलिस ने कर्मचारियों को हिरासत में लिया।
डबवाली में कचरा उठाने पहुंची गाड़ी रोककर रास्ते पर कचरा बिखेर दिया गया। फतेहाबाद के टोहाना में आधी रात धरना दे रहे करीब 70 कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पुलिस पहरे में सफाई कराई गई। जींद में भी कचरा उठाने से रोकने पर कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया।
आम लोगों पर क्या हो रहा असर
हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से आम लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा रहा है। सड़कों से लेकर चौराहों तक कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जिससे बदबू आ रही है। कई दिनों से कूड़े के ढेर पड़े हैं और इस वजह से मच्छर और मक्खियों की समस्या भी बढ़ गई है। मानसून के सीजन में कई दिनों तक कूड़ा नहीं उठने से लोग परेशान हैं और बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।
बता दें कि यमुनानगर में हड़ताल से पहले करीब 30 डंपिंग प्वाइंट थे, जो अब बढ़कर करीब 150 हो गए हैं। कई जगह कचरे के ढेर गलियों और सड़कों तक फैल गए। कैथल शहर के साथ पूंडरी, कलायत, राजौंद, सीवन और गुहला-चीका में एक हजार टन से अधिक कचरा जमा होने का दावा है।
हालांकि, वैकल्पिक व्यवस्था से कुछ जगहों पर कचरा उठ रहा है। चरखी दादरी में नगर परिषद ने पुलिस की मौजूदगी में तीन रातों में करीब 150 टन कचरा उठवाया। पानीपत में नगर निगम ने रात में करीब 200 कर्मचारियों को सफाई व्यवस्था में लगाया है। अंबाला में 250 सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जबकि 125 कर्मचारियों के सहारे सफाई व्यवस्था संभालने का प्रयास किया जा रहा है।
