लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मकान, दुकान और गोदाम किराये पर लेने-देने वालों के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब किरायेदारी का एग्रीमेंट कराने पर पहले की तरह सर्किल रेट के हिसाब से भारी शुल्क नहीं देना होगा. सरकार ने इसके लिए एक तय शुल्क की व्यवस्था को मंजूरी दी है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. सरकार का कहना है कि नए नियम से किराये पर संपत्ति लेना और देना आसान होगा और लोगों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा.
2 लाख सालाना किराये पर सिर्फ 1 हजार
स्टांप एवं पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार रवींद्र जायसवाल ने बताया कि नई व्यवस्था में सालाना किराये के हिसाब से शुल्क तय किया जाएगा. अगर किसी मकान, दुकान या गोदाम का सालाना किराया 2 लाख रुपये है, तो एग्रीमेंट के लिए सिर्फ 1 हजार रुपये शुल्क देना होगा. जबकि अभी तक सर्किल रेट के आधार पर करीब 32 हजार रुपये तक शुल्क देना पड़ता था. इसी तरह 6 लाख रुपये सालाना किराये पर 3 हजार रुपये और 10 लाख रुपये सालाना किराये पर 4,500 रुपये शुल्क देना होगा.
पहले कैसे लगता था शुल्क?
सरकार के मुताबिक, अभी किरायेदारी का एग्रीमेंट कराने पर संपत्ति के सर्किल रेट के चार गुना मूल्य पर 4 फीसदी के हिसाब से शुल्क देना पड़ता था. इससे कई मामलों में किराये की संपत्ति के लिए एग्रीमेंट कराने का खर्च काफी ज्यादा हो जाता था. अब सरकार ने इस तरीके को बदलकर किराये की रकम के आधार पर तय शुल्क रखने का फैसला किया है.
सरकार ने क्यों बदला नियम?
संसदीय एवं वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि इस फैसले का मकसद किराये पर संपत्ति देने वालों का बोझ कम करना और किरायेदारी से जुड़े विवादों को कम करना है. सरकार का मानना है कि जब एग्रीमेंट का खर्च कम होगा तो लोग किरायेदारी का लिखित समझौता कराने के लिए ज्यादा आगे आएंगे. इससे मकान मालिक और किरायेदार दोनों के बीच होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है.
नोटिफिकेशन जारी होते ही मिलेगा फायदा
सरकार ने बताया है कि जिस दिन इस नई व्यवस्था की अधिसूचना जारी होगी, उसी दिन से लोगों को इसका फायदा मिलना शुरू हो जाएगा. यानी इसके लागू होने के बाद किरायेदारी का एग्रीमेंट कराने वालों को पुराने नियम के मुकाबले काफी कम शुल्क देना पड़ेगा.
