
केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन के निरीक्षण के दौरान उन्होंने कहा कि फिल्म में उनके दादा और पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की भूमिका को जिस तरह दिखाया गया है, वह ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खाती। उनका कहना है कि खालड़ा की गिरफ्तारी से पहले ही बेअंत सिंह शहीद हो चुके थे, इसलिए उस घटनाक्रम में उनकी कोई भूमिका नहीं हो सकती। रवनीत बिट्टू ने कहा कि फिल्म को लेकर विवाद केवल इसलिए बढ़ा क्योंकि इससे अभिनेता दलजीत दोसांझ जुड़े हुए हैं। उनके मुताबिक, बहुत से लोग फिल्म के वास्तविक विषय से अधिक दलजीत के नाम की वजह से इसे चर्चा में ला रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म के जरिए गलत तथ्यों को पेश किया जा रहा है और इसे एक तरह के प्रोपेगेंडा के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बेअंत सिंह फरवरी 1992 में पंजाब के मुख्यमंत्री बने थे और 31 अगस्त 1995 को शहीद हुए। जबकि जसवंत सिंह खालड़ा को 6 सितंबर 1995 को हिरासत में लिया गया था। ऐसे में फिल्म में बेअंत सिंह की भूमिका दिखाया जाना तथ्यों के अनुरूप नहीं है। बिट्टू ने कहा कि इतिहास को सही संदर्भों के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए। रवनीत बिट्टू ने इस दौरान पंजाब की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद अपराध और नशे से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी हुई है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का उद्घाटन करेंगे और इसी कार्यक्रम से देश के 75 रेलवे स्टेशनों का वर्चुअल उद्घाटन भी प्रस्तावित है।
