चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने केंद्र के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। केंद्र सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की फ्रांस की आधिकारिक यात्रा के लिए ‘बिना कोई कारण बताए’ राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार कर दिया गया था। सरकार का कहना है कि व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जाने वाली इस यात्रा को मंजूरी न देना ‘मनमाना’ है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में सरकार ने विदेश मंत्रालय के उस फैसले को रद्द करने का अनुरोध किया जिसके तहत 17 से 21 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली एक अंतरराष्ट्रीय खाद्य व्यापार प्रदर्शनी ‘एसआईएएल पेरिस 2026’ में मान को जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था।
याचिका में क्या
पंजाब के सीएम भगवंत मान को 17 से 21 अक्टूबर तक प्रदर्शनी में एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करना था। भारत संघ के खिलाफ 56 पन्नों की एक याचिका में राज्य ने तर्क दिया कि यह दौरा पंजाब की शीर्ष सहकारी संस्था, ‘पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड’ (मार्कफेड) की भागीदारी के सिलसिले में प्रस्तावित किया गया था। पंजाब के सहकारिता विभाग ने तीन और आठ सितंबर को पत्र लिखकर विदेश मंत्रालय से मंजूरी देने का अनुरोध किया था। सरकार ने 9 सितंबर को राजनीतिक मंजूरी के लिए एक ऑनलाइन आवेदन भेजा।
फ्रांस में भारतीय मिशन से सलाह ली गई थी
याचिका में कहा गया है कि फ्रांस में भारतीय मिशन से सलाह ली गई थी, प्रशासनिक मंजूरी और कैडर क्लीयरेंस मिल चुकी थी और पूरा खर्च मार्कफेड (मार्कफेड) को उठाना है। इसके बावजूद, पोर्टल पर आवेदन को बस ‘अस्वीकृत’ दिखा दिया गया है। कोई कारण नहीं बताया गया है और न ही याचिकाकर्ता को अपनी बात रखने का कोई मौका दिया गया। इसमें कहा गया है कि यह कार्रवाई ‘बिना किसी बातचीत के, मनमानी और किसी भी कानून के अधिकार के बिना’’ की गई है।
