शिमला: शिमला: हिमाचल प्रदेश में हिमकेयर योजना की जांच को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर हिमकेयर योजना को बदनाम करने के लिए ‘जांच का नाटक’ करने का आरोप लगाया है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब नकली दवाओं के रैकेट और कथित जीएसटी चोरी जैसे गंभीर मामलों की जांच में विजिलेंस अपनी असमर्थता जता रही है, तो हिमकेयर से जुड़े मामले की जांच में इतनी तत्परता क्यों दिखाई जा रही है?
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में नकली दवाओं के रैकेट की जांच की आवश्यकता न्यायालय की ओर से भी जताई गई है. इसके बावजूद स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने इस मामले की जांच करने में असमर्थता जताई है. जयराम ने सवाल किया कि क्या प्रदेश की जांच एजेंसी वास्तव में जांच करने में सक्षम नहीं है या फिर सरकार की जांच करवाने की ही इच्छा नहीं है? उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार, पूर्व भाजपा सरकार की लोकप्रिय हिमकेयर योजना को केवल बदनाम करने के उद्देश्य से यह जांच करवा रही है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ भाजपा नेताओं और सरकार के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ विजिलेंस बहुत तेजी से कार्रवाई करती है, वहीं दूसरी तरफ जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले नकली दवाओं के गंभीर मामले की जांच से पीछे हट रही है. यह सरकार के कथित ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के दावों पर बड़ा सवालिया निशान है.
जीएसटी चोरी और रिकॉर्ड में हेराफेरी का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हाल ही में एक दवा निर्माता से जुड़ा मामला सामने आया था, जिसमें कथित तौर पर नकली दवाओं की बिक्री और जीएसटी चोरी के लिए रिकॉर्ड में हेराफेरी के गंभीर आरोप थे. इसी मामले में न्यायालय में एक और प्रतिनिधित्व दिया गया, जिसमें लगभग 27 से 28 टन कच्चे माल की अवैध सप्लाई और करोड़ों की जीएसटी चोरी की बात सामने आई थी. इस पूरे प्रकरण की भी विस्तृत जांच की मांग की गई थी.
विजिलेंस के पत्र का दिया हवाला
जयराम ठाकुर ने खुलासा किया कि स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने 1 जुलाई 2026 को पत्र भेजकर इस मामले की जांच में अपनी असमर्थता जताई थी. ब्यूरो की ओर से कहा गया था कि यह मामला वित्तीय रूप से काफी जटिल है और इसकी जांच के लिए उनके पास पर्याप्त मैनपावर, संसाधन तथा राजस्व विभाग से जुड़े तकनीकी और डोमेन ज्ञान की कमी है. जयराम ने इसी पत्र को आधार बनाकर सवाल उठाया कि जब इतनी बड़ी वित्तीय गड़बड़ी की जांच के लिए विजिलेंस तकनीकी ज्ञान की कमी का हवाला दे रही है, तो हिमकेयर से जुड़े जटिल चिकित्सकीय मामलों की जांच वे किस आधार पर कर रहे हैं? उन्होंने पूछा कि अगर जीएसटी और नकली दवाओं से जुड़े मामलों की जांच के लिए विजिलेंस और पुलिस विभाग के पास पर्याप्त तकनीकी ज्ञान नहीं है, तो विशेषज्ञ डॉक्टरों की ओर से मरीजों के इलाज के दौरान लिए गए फैसलों की समीक्षा ये एजेंसियां कैसे कर रही हैं? उन्होंने दुर्लभ कैंसर के मरीजों को उनकी स्थिति और जांच के आधार पर दी गई दवाओं को लेकर की जा रही जांच पर भी गंभीर सवाल उठाए.
मुख्यमंत्री के बयानों को सही साबित करने की कोशिश
नेता प्रतिपक्ष ने सीधा आरोप लगाया कि हिमकेयर की जांच का उद्देश्य वास्तविक अनियमितताओं का पता लगाना नहीं, बल्कि केवल मुख्यमंत्री के बयानों को सही साबित करना है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले भी संगठित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में मुख्यमंत्री कार्यालय की संलिप्तता को लेकर सवाल उठ चुके हैं. इन मुद्दों पर बार-बार आवाज उठाए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है. उन्होंने सरकार से दो टूक पूछा कि आखिर नकली दवाओं के मामले में जांच से पीछे हटने की असली वजह क्या है और हिमकेयर की जांच को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है?
रोबोटिक सर्जरी पर उठे सवाल
वहीं, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधायक विनोद कुमार ने प्रदेश में रोबोटिक सर्जरी नेटवर्क स्थापित करने की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा आधुनिक चिकित्सा तकनीक के विस्तार के खिलाफ नहीं है, लेकिन रोबोटिक सर्जरी मशीनों की खरीद में पारदर्शिता जरूरी है. विनोद कुमार ने सरकार से रोबोटिक सर्जरी मशीनों की कीमत, टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी मानकों और रखरखाव से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की. उन्होंने पूछा कि किस कंपनी की कौन-सी मशीन, किस तकनीकी मानक के साथ कितनी कीमत में खरीदी या प्रस्तावित की गई है और अन्य राज्यों या संस्थानों में समान मशीनों की कीमत क्या रही है.
विधायक ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी सिस्टम में सिर्फ मशीन की कीमत ही खर्च नहीं होती. इसके अलावा रखरखाव, सॉफ्टवेयर, उपकरण, ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले कंज्यूमेबल्स, प्रशिक्षण और अन्य खर्च भी जुड़े होते हैं. इसलिए सरकार को अगले पांच से दस साल की पूरी अनुमानित लागत भी सार्वजनिक करनी चाहिए. विनोद कुमार ने कहा कि केवल महंगी मशीनें खरीद लेने से स्वास्थ्य व्यवस्था आधुनिक नहीं हो जाती. जिन अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी शुरू की जानी है, वहां विशेषज्ञ डॉक्टर, एनेस्थीसिया टीम, प्रशिक्षित नर्सिंग और तकनीकी स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी. उन्होंने कहा कि भाजपा आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का समर्थन करती है, लेकिन सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी है.
