लखनऊ। हाई कोर्ट के आदेश पर रविवार को कचहरी रोड से अवैध कब्जे हटाए गए, उसमें अधिकतर वकीलों के चैंबर व दुकानें थीं। पुलिस और पीएसी बल की मौजूदगी में नगर निगम का बुलडोजर सुबह करीब नौ बजे से अवैध कब्जे हटाना शुरू किया तो वकीलों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। नारेबाजी और पथराव के बीच पुलिस को लाठीचार्ज कर वकीलों को खदेड़ना पड़ा।
कार्रवाई के दौरान एक वकील ने आत्महत्या करने का प्रयास किया तो कुछ जमीन पर लेट गए। कुछ वकीलों ने लाठीचार्ज में चोटिल होने का भी आरोप लगाया है। अधिकारियों का कहना है कि पथराव में एक सिपाही के घायल होने पर बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया गया।
इस दौरान 100 के करीब चैंबर ध्वस्त किए गए। विरोध के चलते कार्रवाई दोपहर डेढ़ बजे रोकनी पड़ी। शाम को फिर टीम जुटी, लेकिन सूर्यास्त होने पर कार्रवाई स्थगित कर दी गई। नगर निगम को 25 मई को हाई कोर्ट में शपथ पत्र देना है, उससे पहले शेष अवैध कब्जे भी हटाए जाएंगे।
बुलडोजर और भारी पुलिस बल के साथ पहुंची नगर निगम की टीम
नगर निगम की टीम बुलडोजर और भारी पुलिस बल के साथ रविवार सुबह करीब नौ बजे कचहरी रोड पहुंची। टीम ने सबसे पहले स्वास्थ्य भवन की तरफ बने करीब 80 चैंबर और निबंधन भवन की तरफ के 17-18 चैंबर ध्वस्त कर दिए गए। अवकाश होने के बावजूद कार्रवाई की सूचना पर बड़ी संख्या में अधिवक्ता वहां पहुंच गए और विरोध करने लगे।
कुछ अधिवक्ता बुलडोजर के सामने खड़े हो गए तो कुछ जमीन पर लेट गए। कई वकीलों ने आरोप लगाया कि लाल निशान लगाने के बावजूद एक मजार को नहीं तोड़ा गया। इसी तरह कुछ वकीलों ने बार एसोसिएशन के दबाव में दो कब्जों को नहीं तोड़ने का आरोप लगाया, जिससे वकील आक्रोशित होने लगे। रजिस्ट्रार कार्यालय के पास 70 से 80 वकीलों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
उनका कहना था कि राजस्व की जमीन पर बने निर्माण को भी तोड़ा जा रहा है। तभी भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव करने लगे, जिसमें एक सिपाही घायल हो गया। पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो कुछ अधिवक्ताओं ने नगर निगम के अधिकारियों को निपटने तक की धमकी दे डाली।
वकीलों के साथ सड़क पर धरने पर बैठे
सेंट्रल बार एसोसिएशन के महामंत्री अवनीश दीक्षित उर्फ हनी वकीलों के साथ सड़क पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि कई वकीलों ने पहले ही अपने चैंबर खाली कर दिए थे। फिर भी प्रशासन भारी पुलिस बल और पीएसी लेकर पहुंचा। डीसीपी पश्चिम कमलेश दीक्षित ने वकीलों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।
अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि 25 मई को हाई कोर्ट में अवैध कब्जों को हटाने की प्रगति रिपोर्ट देनी है। उनका कहना है कि किसी तरह का पक्षपात नहीं किया गया है। मजार के बगल में बनी दुकान पर लाल निशान लगाया गया था, जिसे तोड़ा गया है।
यह है हाई कोर्ट का आदेश
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की पीठ ने अधिवक्ता अनुराधा सिंह, अधिवक्ता देवांशी श्रीवास्तव और देवांशी की माता अरुणिमा श्रीवास्तव की तरफ से 11 मार्च को दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान कचहरी रोड से अवैध कब्जों को हटाने का आदेश दिया था, लेकिन नगर निगम ने यह कहकर कोई कार्रवाई नहीं की थी कि पर्याप्त पुलिस बल के बिना अवैध कब्जों हटाना संभव नहीं है।
इसके बाद हुई दो सुनवाई के दौरान कोर्ट की नाराजगी देखने को मिली और अगली सुनवाई में कोर्ट ने जिला प्रशासन को पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने के साथ ही 25 मई को कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट भी तलब की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि चैंबर बनाकर अवैध कब्जों की आड़ में अराजकता हो रही है।
अवैध कब्जे हटाने की यह थी तैयारी
- दस बुलडोजर लेकर कब्जे हटाने पहुंची थी नगर निगम की टीम।
- दो कंपनी पीएसी अवैध कब्जे हटाने के लिए लगाई गई थी।
- 14 थानों की पुलिस फोर्स कचहरी रोड में एहतियातन तैनात की गई।
- 500 से अधिक पुलिसकर्मी वजीरगंज, कैसरबाग, चौक, ठाकुरगंज, मलिहाबाद, तालकटोरा और पारा समेत कई थानों के रहे।
नगरनिगम अधिकारियों को निपट लेने की धमकी
विरोध के दौरान कुछ अधिवक्ताओं ने नगर निगम अधिकारियों को निपट लेने तक की धमकी दे डाली। सेंट्रल बार एसोसिएशन के महामंत्री अवनीश दीक्षित उर्फ हनी अधिवक्ताओं के साथ सड़क पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि कई वकीलों ने पहले ही अपने चैंबर खाली कर दिए थे, इसके बावजूद प्रशासन भारी पुलिस बल और पीएसी लेकर पहुंचा। डीसीपी पश्चिम कमलेश दीक्षित ने अधिवक्ताओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।
ऐसे शुरु हुई कार्रवाई
जनवरी 2026 से कोर्ट परिसर के बाहर अवैध कब्जों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। अधिवक्ता सुनीता सिंह समेत अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं। सात मई को हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। 12 मई को नगर निगम ने अवैध चैंबरों पर लाल निशान लगाकर 16 मई तक कब्जा खाली करने का नोटिस जारी किया था। भारी विरोध और तनावपूर्ण हालात को देखते हुए दोपहर में कार्रवाई स्थगित कर दी गई थी।
