शिमला। हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने लंबित पेंशन मामलों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति ने आरोप लगाया कि मंत्रिमंडल की सैद्धांतिक मंजूरी के बावजूद हजारों पेंशनरों को अब तक संशोधित पेंशन का लाभ नहीं मिल पाया है। शिमला नगर निगम के 800 पेंशनरों की फाइलें अभी भी आगे नहीं बढ़ी है।
समिति ने कड़ा एतराज जताते हुए उन्हें तत्काल शहरी विकास निदेशालय भेजने की मांग की है। समिति ने सरकार से 6,564 निगम एवं बोर्ड कर्मचारियों को पेंशन योजना के दायरे में लाने, 40 प्रतिशत वित्तीय लाभ की अधिसूचना जारी करने और 15 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) तुरंत देने की मांग की गई है। समिति ने नगर निगम शिमला के महापौर को ज्ञापन भी सौंपा।
समिति के प्रदेश अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री को सौंपे गए 14 सूत्रीय मांगपत्र पर सरकार के साथ दो दौर की वार्ता हो चुकी है और छह मांगों पर कार्रवाई शुरू हुई है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय मामलों पर अभी तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने इसी महीने शहरी स्थानीय निकायों के करीब 2,300 पेंशनरों को 1 जनवरी 2016 से संशोधित वेतनमान के आधार पर पेंशन देने की सैद्धांतिक मंजूरी दी थी, लेकिन धरातल पर अभी तक अमल नहीं हो सका। आरोप लगाया गया कि पेंशनरों को आज भी 2006 के वेतनमान के आधार पर पेंशन मिल रही है, जबकि शहरी विकास विभाग सभी निकायों को प्रस्ताव भेजने के निर्देश पहले ही जारी कर चुका है।
समिति ने सरकार से 29 अक्टूबर 1999 की अधिसूचना बहाल कर निगमों और बोर्डों के शेष 6,564 कर्मचारियों को भी पेंशन का लाभ देने की मांग की है। सरकार को उसका वादा याद दिलाते हुए कहा कि 31 जुलाई 2026 से पहले 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त सभी पेंशनरों को 40 प्रतिशत वित्तीय लाभ और लंबित 15 प्रतिशत डीए जारी किया जाए। समिति ने चेतावनी दी कि यदि तय समय में अधिसूचनाएं जारी नहीं हुईं तो पेंशनरों का आंदोलन पूरे प्रदेश में और व्यापक किया जाएगा।
