प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शस्त्र लाइसेंस की जानकारी देने के लिए प्रदेश सरकार को तीन दिन का और समय दिया है. कोर्ट ने साफ किया कि इसके बाद सरकार को और मोहलत नहीं दी जाएगी. यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने जयशंकर उर्फ बैरिस्टर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पिछले आदेश के आंशिक अनुपालन में गृह सचिव के हस्ताक्षर से एक हलफनामा दाखिल किया गया है. इसमें कुल 83 लोगों में 42 लोगों से शस्त्र लाइसेंस की जानकारी दी गई है. बाकी बचे 41 लोगों के बारे में डेटा जुटाने और उसकी जांच का काम चल रहा है, जिसके लिए सरकार ने एक सप्ताह का समय मांगा.
इस पर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 मई की तारीख तय की है. कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि विभाग को अपने सभी संसाधनों का इस्तेमाल कर तय समय के भीतर पूरी रिपोर्ट सौंपनी होगी. इसके बाद कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा. सुनवाई के दौरान कोर्ट की मदद के लिए इंस्पेक्टर रैंक या उससे ऊपर के एक अधिकारी को मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है.
उक्त अधिकारी को मामले से जुड़े सभी तथ्यों, आंकड़ों और जिलों से जुटाए गए विवरणों की पूरी जानकारी होनी चाहिए. गौरतलब है कि कोर्ट ने रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया, धनंजय सिंह, सुशील सिंह, बृजभूषण सिंह, विनीत सिंह, अजय मरहद, सुजीत सिंह बेलवा, उपेंद्र सिंह गुड्डू, पप्पू भौकाली, इंद्रदेव सिंह, सुनील यादव, फरार अजीम, बादशाह सिंह, संग्राम सिंह, सुल्लू सिंह, चुलबुल सिंह, सनी सिंह, छुन्नू सिंह और डॉ उदयभान सिंह के शस्त्र लाइसेंस के बारे में जानकारी देने के लिए कहा है.
कोर्ट ने इन व्यक्तियों के सही पते, आपराधिक मामलों, शस्त्र लाइसेंस और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा था. कोर्ट ने कहा था कि असलहों का खुला प्रदर्शन प्रभुत्व और ताकत का भ्रम पैदा करता है, लेकिन इससे आम लोगों में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ती है. कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि आत्मरक्षा के नाम पर असलहों का प्रदर्शन सार्वजनिक स्थलों को भय व दबदबे के वातावरण में बदल देता है, जो शांतिपूर्ण समाज के लिए उचित नहीं है.
