चंडीगढ़: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य के एनसीआर (NCR) क्षेत्र को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय साझा किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि हरियाणा के वर्तमान एनसीआर क्षेत्र (Boundary) में कोई भी बदलाव नहीं किया जाएगा।
इस बयान के साथ ही उन सभी चर्चाओं और प्रस्तावों पर पूरी तरह विराम लग गया है, जिनमें हरियाणा के कुछ दूरदराज के जिलों को एनसीआर के दायरे से बाहर करने की बात कही जा रही थी।
पिछले कुछ समय से ऐसी अटकलें थीं कि दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर के दायरे से बाहर आने वाले हरियाणा के कुछ जिलों को एनसीआर से हटाया जा सकता है, ताकि वहां के लोगों को कड़े नियमों से राहत मिल सके। लेकिन बोर्ड बैठक के बाद मुख्यमंत्री सैनी ने साफ तौर पर कहा आज की बैठक में यह तय हुआ है कि एनसीआर (NCR) के मौजूदा एरिया में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
इस बड़े फैसले के मुख्य मायने और असर
एनसीआर का दायरा कम न होने से हरियाणा के सभी 14 जिलों को बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास के लिए केंद्रीय फंड मिलता रहेगा। मेट्रो विस्तार, एक्सप्रेसवे और रैपिड रेल (RRTS) जैसी बड़ी परियोजनाओं को इससे और गति मिलेगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और ग्रेप (GRAP) के कड़े नियम इन सभी इलाकों में पहले की तरह ही प्रभावी रहेंगे। इनमें प्रदूषण के दौरान निर्माण कार्यों पर रोक और 10 साल पुराने डीजल व 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर पाबंदी शामिल है। बैठक में पर्यावरण सुरक्षा को लेकर भी प्रतिबद्धता दोहराई गई, जिससे अरावली पहाड़ियों और प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्रों (NCZ) से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी।
