लखनऊ। प्रदेश सरकार अपनी चर्चित योजनाओं वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी), ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन इको टूरिज्म’ और वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूजीन (ओडीओसी) की तर्ज पर अब वन डिस्ट्रिक्ट वन वेटलैंड (ओडीओडब्ल्यू) शुरू करने जा रही है।
इसके तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक प्रमुख वेटलैंड चिह्नित कर उसका संरक्षण, पुनर्जीवन और विकास किया जाएगा। विश्व वेटलैंड दिवस दो फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसकी घोषणा कर सकते हैं।
वन विभाग ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी है। सभी जिलों से उनके यहां के प्रमुख वेटलैंड की सूची मांगी गई है ताकि इस योजना में उन्हें शामिल किया जा सके।
यूं तो वर्ष 2022 में वन विभाग ने इसकी संकल्पना पर काम शुरू किया था किंतु एक जिला-एक इको पर्यटन योजना आने के बाद यह योजना मूर्त रूप नहीं ले पाई थी। एक जिला एक व्यंजन योजना में मुख्यमंत्री की दिलचस्पी देखकर अब वन विभाग ने ओडीओडब्ल्यू योजना पर काम शुरू करने का निर्णय लिया है।
सरकार का फोकस वेटलैंड को अतिक्रमण से मुक्त कराने, जैव विविधता को सुरक्षित रखने और उन्हें इको-पर्यटन के हब के रूप में विकसित करने पर होगा। इससे न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी बल्कि स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर भी पैदा होंगे।
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (परियोजना) राम कुमार की ओर से सभी प्रभागीय वनाधिकारियों (डीएफओ) और प्रभागीय निदेशकों को पत्र भेजकर प्रत्येक जिले में एक वेटलैंड चयनित करने के लिए कहा गया है।
चयन के दौरान इको-टूरिज्म, पारिस्थितिकी, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व को ध्यान में रखने के निर्देश दिए गए हैं। वन विभाग ने वेटलैंड से जुड़ी विस्तृत जानकारी तय प्रारूप में उपलब्ध कराने को कहा है, जिसमें जिला, रेंज, स्थल का नाम, वेटलैंड का नाम व क्षेत्रफल, प्रकार (शहरी, अर्द्धशहरी या ग्रामीण), जीपीएस कोआर्डिनेट्स और पूर्व में चयनित या नए वेटलैंड का विवरण शामिल होगा।
शासन स्तर पर इसे प्रदेश में वेटलैंड संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसमें चयनित वेटलैंड भविष्य में इको पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किए जाएंगे। इनका इस तरह से विकास होगा ताकि इन्हें वेटलैंड के मानक के रूप में देखा जा सके।
प्रदेश में हैं 1.21 लाख से अधिक वेटलैंड
राष्ट्रीय वेटलैंड एटलस के अनुसार प्रदेश में 23,890 प्रमुख बड़े वेटलैंड हैं। इनके अलावा 97,352 छोटे वेटलैंड हैं जो 2.25 हेक्टेयर से छोटे हैं। यानी प्रदेश में कुल 1,21,242 हैं।
वहीं, वन विभाग कुछ वर्ष पूर्व छोटे-बड़े कुल 1.33 लाख वेटलैंड राजस्व अभिलेखों से दर्ज करा चुका है। प्रदेश में 10 वेटलैंड को “रामसर साइट” के रूप में घोषित किया जा चुका है। यह अंतरराष्ट्रीय रूप से महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि हैं।
क्या होते हैं वेटलैंड
वेटलैंड (आर्द्रभूमि या नमभूमि) वह क्षेत्र है, जहां उथले पानी के जीव जंतु एवं वनस्पतियां पाई जाती हैं। इनमें प्राकृतिक या कृत्रिम, स्थाई या अस्थाई जल वर्ष भर रहता है।
यहां का तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है और आर्द्रता रहती है। यह एक पारिस्थितिकी तंत्र (ईकोसिस्टम) होता है, जिसमें दलदल, मैंग्रोव, झीलें और धान के खेत शामिल हैं। ये पानी को साफ करते हैं और भूजल को रिचार्ज करते हैं।
