देहरादून/दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के विज्ञान केंद्र में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2026 धूमधाम से मनाया गया. इस मौके पर उत्तराखंड के 50 ग्राम प्रधानों को दिल्ली बुलाया गया. जिसमें 10 ग्राम प्रधान टिहरी की भी शामिल रहे. जिन्हें केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने सम्मानित किया. इस दौरान गांव के विकास के रूप रेखा के बारे में भी चर्चा की गई.
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के उपलक्ष्य पर आज यानी 24 अप्रैल को विज्ञान केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा की पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल हुए. इस दौरान केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री सत्य पाल सिंह बघेल, संयुक्त सचिव मुक्ता शेखर, राजेश कुमार सिंह और पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज समेत अन्य ने उत्तराखंड से आए सभी ग्राम प्रधानों के साथ बैठक की. जिसमें गांव के विकास को लेकर चर्चा की गई.
इस दौरान बताया गया कि पंचायतों के विकास के लिए 16 वें वित्त की धनराशि को 85 फीसदी तक बढ़ाया गया है. वहीं, टिहरी जिले के रौलाकोट, भेंनगी, पातुड़ी गांव समेत 10 ग्राम प्रधानों को भी सम्मानित किया गया. इस ग्राम प्रधानों ने गांव के विकास में अहम योगदान दिया है. जिस वजह से उन्हें सम्मानित किया है. इस मौके पर गांव के विकास के रूप रेखा के बारे में विस्तार से बात की गई.
बता दें कि इस मौके पर पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई) 2.0 की रिपोर्ट और ‘मेरी पंचायत मेरी धरोहर’ पर 3 पुस्तकों का विमोचन भी किया गया. इसके अलावा मंत्रालय की ‘पंचायत धरोहर पहल’ के अंतर्गत ग्रामीण विरासत पर 3 सचित्र पुस्तकें त्रिपुरा की ग्रामीण विरासत पर एक मोनोग्राफ, तिरुपति की ग्रामीण विरासत पर एक मोनोग्राफ और ‘उत्तरकाशी: सौम्या काशी: हिमालयी विरासत की आत्मा’ जारी की गई.
24 अप्रैल को मनाया जाता है राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस: गौर हो कि हर साल 24 अप्रैल को पूरे देश में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है. जो स्थानीय स्वशासन की औपचारिक संरचना के रूप में पंचायती राज प्रणाली की स्थापना की यादों को ताजा करता है. यह 73वें संविधान संशोधन अधिनियम 1992 के कार्यान्वयन का प्रतीक है, जो साल 1993 में लागू हुआ था. इस संशोधन ने पंचायती राज संस्थानों को भी संवैधानिक दर्जा दिया. पंचायतों से संबंधित प्रावधान भारत के संविधान के भाग IX में उल्लेखित किए गए हैं.
पूरे देशभर में हैं 2.5 लाख से ज्यादा पंचायतें: पूरे देश भर में 2.5 लाख से ज्यादा पंचायतें हैं, जिनमें करीब 24.04 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल हैं. खास बात ये है कि इन प्रतिनिधियों में करीब 49.75 फीसदी महिलाएं हैं. जो समावेशी स्थानीय शासन की दिशा में एक अहम बदलाव को दर्शाता है.
