राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने पटियाला में आयोजित ‘राष्ट्रीय महिला आयोग आपके द्वार’ कार्यक्रम के तहत जन सुनवाई कर महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुना। इस विशेष पहल का उद्देश्य महिलाओं को न्याय और सहायता के लिए सीधे आयोग से जोड़ना है, ताकि उन्हें अपनी शिकायतों के समाधान के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
जन सुनवाई कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया और घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद, दहेज उत्पीड़न, संपत्ति संबंधी मामलों, कार्यस्थल पर उत्पीड़न तथा अन्य सामाजिक समस्याओं से जुड़े प्रकरण आयोग के समक्ष रखे। महिलाओं ने अपनी परेशानियों को सीधे राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष के सामने रखा और त्वरित कार्रवाई की मांग की।
विजया रहाटकर ने सभी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा राष्ट्रीय महिला आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी पीड़ित महिला को न्याय से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्रीय महिला आयोग आपके द्वार’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आयोग को आम महिलाओं तक पहुंचाना है, ताकि दूर-दराज क्षेत्रों की महिलाएं भी अपनी समस्याएं सीधे आयोग तक पहुंचा सकें। इस पहल के माध्यम से शिकायतों का त्वरित निस्तारण और पीड़ित महिलाओं को आवश्यक कानूनी व प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
जन सुनवाई के दौरान कई मामलों का मौके पर ही समाधान करने का प्रयास किया गया, जबकि जटिल मामलों को संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों के पास भेजकर उनकी नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
विजया रहाटकर ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार तथा राष्ट्रीय महिला आयोग लगातार कार्य कर रहे हैं। महिला सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं और अभियान चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने महिलाओं से अपील की कि किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या अन्याय की स्थिति में चुप न रहें और अपने अधिकारों के लिए आगे आएं। आयोग हर जरूरतमंद महिला की सहायता के लिए हमेशा तत्पर है और उनकी शिकायतों का निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। जन सुनवाई के माध्यम से महिलाओं की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।
