कविता एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजेता बच्चों को किया गया सम्मानित
गोरखपुर, 30 जुलाई, 2026ः मुख्य कारखाना प्रबन्धक/यांत्रिक कारखाना डॉ० सुनील कुमार शर्मा की अध्यक्षता तथा
प्रो. नलिन रंजन सिंह के मुख्य आतिथ्य में यांत्रिक कारखाना, गोरखपुर में 29 जुलाई, 2026 को ‘मुंशी प्रेमचंद जयंती‘ समारोह
का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान
वक्ताओं ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व, साहित्यिक योगदान तथा उनकी रचनाओं की वर्तमान समय में उपयोगिता पर अपने विचार
व्यक्त किये। इस अवसर पर कारखाना के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी, उनके परिवार के सदस्य, प्रतियोगी बच्चे एवं साहित्य-प्रेमी
उपस्थित थे।
मुख्य अतिथि प्रो. नलिन रंजन सिंह ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य जीवन की सच्चाइयों से जुड़ा हुआ है। उनकी
रचनाओं में भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों का वास्तविक एवं संवेदनशील चित्रण मिलता है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की
रचनायें बच्चों एवं युवाओं में सामाजिक समझ, मानवीय संवेदना तथा साहित्य के प्रति रुचि विकसित करती हैं। प्रो. सिंह ने कहा
कि प्रेमचंद किसानों की स्थिति को लेकर सदैव चिंतित रहे। उनके उपन्यास ‘प्रेमाश्रम’, ‘कर्मभूमि’ एवं ‘गोदान’ तथा कहानी ‘पूस
की रात’ में किसान जीवन एवं सामाजिक संघर्ष का सजीव चित्रण मिलता है। उनकी रचनायें पाठकों को समाज की
वास्तविकताओं से परिचित कराने के साथ अधिक संवेदनशील एवं जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने यांत्रिक कारखाना
प्रशासन द्वारा कर्मचारियों के बच्चों को साहित्यिक एवं रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिये किये जा रहे प्रयासों की सराहना
की। प्रो. सिंह ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों की प्रतिभा को पहचानने, उनका आत्मविश्वास बढ़ाने एवं उन्हें अपनी
अभिव्यक्ति के लिये उपयुक्त मंच देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रो. सिंह ने साहित्य को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज
को जागरूक करने तथा मानवीय मूल्यों को मजबूत बनाने का माध्यम माना। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद जयंती मनाने का वास्तविक
उद्देश्य उनके विचारों को समझना एवं उन्हें अपने जीवन में अपनाना है।
इसके पूर्व, समारोह की अध्यक्षता करते हुये मुख्य कारखाना प्रबन्धक डॉ० सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि प्रेमचंद
आधुनिक हिंदी साहित्य की चेतना में परिवर्तन लाने वाले महान लेखक थे। उन्होंने अपने बाद आने वाले लेखकों की सोच और
दृष्टि का विस्तार किया तथा हिंदी कथा-साहित्य को नई दिशा प्रदान की। यही कारण है कि हिंदी साहित्य में प्रेमचंद की समृद्ध
परम्परा आज भी कायम है। डॉ० शर्मा ने बच्चों और युवाओं से प्रेमचंद की रचनायें पढ़ने का आह्वान करते हुये कहा कि उनका
साहित्य समाज को समझने, दूसरों के दुःख के प्रति संवेदनशील बनने तथा मानवीय मूल्यों की रक्षा करने की प्रेरणा देता है।
यांत्रिक कारखाना के उप मुख्य राजभाषा अधिकारी श्री अनुज मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद जयंती जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य
केवल महान साहित्यकारों को स्मरण करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को हिंदी भाषा, साहित्य तथा मानवीय मूल्यों से जोड़ना भी
है। कविता, कहानी, निबंध, पुस्तक-पाठ तथा साहित्यिक कार्यशालायें बच्चों की भाषा-दक्षता, रचनात्मकता एवं आत्मविश्वास के
विकास में सहायक होती हैं।
समारोह में रेल कर्मचारियों के बच्चों के लिये पूर्व में आयोजित कविता-लेखन एवं निबंध-लेखन प्रतियोगिताओं के
विजेताओं को मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पुरस्कार तथा प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय
है कि इससे पूर्व, यांत्रिक कारखाना प्रशासन द्वारा रेल कर्मचारियों के बच्चों के लिये कौशल विकास एवं साहित्यिक कार्यशाला का
आयोजन किया गया था। कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों में हिंदी भाषा के प्रति रुचि, रचनात्मक लेखन, मंच-अभिव्यक्ति,
आत्मविश्वास, संवाद-कौशल एवं साहित्यिक संवेदनशीलता का विकास करना है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ अनुवादक श्रीमती अनामिका सिंह ने यांत्रिक कारखाना, गोरखपुर में राजभाषा हिंदी के प्रयोग,
प्रचार-प्रसार तथा राजभाषा सम्बन्धी कार्य-निष्पादन पर विस्तृत प्रस्तुति दी। साथ ही उन्होंने कारखाना के प्रशासनिक, तकनीकी
एवं दैनिक कार्यालयी कार्यों में हिंदी के बढ़ते प्रयोग की जानकारी दी। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
