चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक सुचारू बनाने के उद्देश्य से वरिष्ठ अधिकारियों के बीच विभागों के कामकाज का नये सिरे से बंटवारा किया गया है।
हाल ही में अतिरिक्त प्रधान सचिव के पद से साकेत कुमार की विदाई और उप सचिव के रूप में अजय कुमार की नियुक्ति के बाद यह पुनर्गठन किया गया है। मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर के पास गृह, एक्साइज, फाइनेंस और विजिलेंस समेत 18 विभागों के कामकाज की जिम्मेदारी रहेगी। खुल्लर मुख्यमंत्री कार्यालय के ओवरआल इंचार्ज भी रहेंगे।
सीएम के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता के पास 10 विभागों की जिम्मेदारी रहेगी, जबकि सीएम के उप प्रधान सचिव यशपाल को नौ विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सीएम के नये उप प्रधान सचिव अजय कुमार को सात विभाग सौंपे गए हैं, जबकि सीएम के ओएसडी राज नेहरू के पास तीन विभाग और ओएसडी विवेक कालिया के पास सीएम विंडो व जनसंवाद की जिम्मेदारी रहेगी। सीएम के ओएसडी सुधांशु गौतम के पास तबादलों व मकान आवंटन समेत पांच कार्यक्षेत्र रहेंगे, जबकि ओएसडी राकेश संधू सीएम विंडो और ग्रीवेंस और नरेंद्र पाल मलिक सीएम घोषणाएं देखेंगे।
कार्यों के क्रियान्वयन को किया जाएगा मॉनिटर
मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी मुख्यमंत्री के पास आने वाली फाइलों के निस्तारण, नीतिगत निर्णयों के क्रियान्वयन और विभागीय समन्वय की जिम्मेदारी निभाते हैं। नई व्यवस्था में मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर के पास वित्त, राजस्व, सामान्य प्रशासन, स्वास्थ्य, उद्योग, शहरी विकास, विधायी कार्य, आपदा प्रबंधन सहित प्रमुख विभागों की समग्र जिम्मेदारी रखी गई है।
प्रधान सचिव अरुण गुप्ता के पास नागरिक उड्डयन, पर्यावरण, खनन, लोक निर्माण, सामाजिक न्याय, परिवहन और शहरी निकाय जैसे विभागों का दायित्व होगा। मुख्यमंत्री की घोषणाओं के क्रियान्वयन से जुड़े कार्य भी उनके स्तर पर मॉनिटर किए जाएंगे।
आवास योजनाओं सहित अहम विभागों का मिला जिम्मा
कामकाज के नये बंटवारे में उप सचिव अजय कुमार को सहकारिता, चुनाव, मत्स्य पालन, महिला एवं बाल विकास, आवास योजनाओं सहित कई अहम विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही बजट घोषणाओं और लंबित परियोजनाओं की निगरानी का कार्य भी उनके पास रहेगा।
उप सचिव यशपाल को पंचायत, विकास, श्रम, स्कूल शिक्षा, खेल और सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी जैसे विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री के ओएसडी स्तर के अधिकारियों को भी विशिष्ट कार्य दिए गए हैं। अधिकारियों के बीच सरकारी विभागों के कामकाज के बंटवारे से जवाबदेही तय होगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व समयबद्ध बनेगी।
