श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने अब राममंदिर की निर्माण लागत 800 करोड़ से 2200 करोड़ रुपये पहुंचने का मामला एसआईटी के सामने उठाया है। पहले लगाए गए आरोपों पर एसआईटी ने महिपाल से लिखित में साक्ष्य मांगा था। साक्ष्य भेजने के साथ ही महिपाल ने पूर्व महासचिव चंपत राय पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। 20 बिंदुओं पर यहां हुए कई घोटालों का जिक्र करते हुए पूरी सूची भेजी है। महिपाल सिंह ने चंपत राय, टिन्नू यादव, बैंक कर्मचारियों समेत कई अन्य कर्मचारियों का नाम भी लिखा है। 26 जुलाई को कमिश्नर लखनऊ और पहली एसआईटी के प्रमुख विजय विश्वास पंत ने महिपाल सिंह को मेल से लिखित रूप से साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा था।
महिपाल सिंह ने एसआईटी से मांग की है कि उनकी शिकायत में शामिल सभी बिंदुओं की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाए। इससे पहले आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी एसआईटी को जमीन की खरीद में घोटाले का आरोप लगाते हुए दस्तावेज सौंपे थे। इसमें भी चंपत राय पर ही सबसे ज्यादा आरोप लगाए गए थे।
कम खर्च अधिक वसूली
महिपाल सिंह का आरोप है कि रामशंकर यादव टिन्नू यादव को तत्कालीन महासचिव चंपत राय द्वारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थीं। वह राम मंदिर परिसर में एक तरह से स्वयंभू प्रभारी की भूमिका में काम कर रहे थे। शिकायत में कहा गया है कि कम खर्च होता था लेकिन अधिक दिखाकर धन की वसूली की जाती थी, जिसका समुचित सत्यापन भी नहीं होता था।
मंदिर निर्माण की लागत पर सवाल
महिपाल सिंह ने अपनी शिकायत में राम मंदिर निर्माण की लागत पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शुरुआत में मंदिर निर्माण की अनुमानित लागत लगभग 800 करोड़ रुपये तय की गई थी, लेकिन बाद में यह बढ़कर करीब 2200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। उनका सवाल है कि जब मंदिर का स्वरूप, डिजाइन और निर्माण योजना पहले से तय थी, तो लागत में इतनी बड़ी वृद्धि किन कारणों से हुई।
यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान कई ऐसे स्थायी निर्माण कराए गए, जिनकी तत्काल आवश्यकता नहीं थी और जिन्हें अस्थायी व्यवस्था से भी पूरा किया जा सकता था। उनके अनुसार, इन कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, जिसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
चंपत राय ने शिकायतों को अनसुना किया
चंदा चोरी कैसे होती थी, इसे भी महिपाल ने लिखित रूप से बताया है। यह भी बताया कि इसकी शिकायत भी चंपत राय से की गई लेकिन इसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया गया। कहा कि बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से निर्धारित 10 गड्डियों के स्थान पर कभी 11, 12 और 13 गड्डियां परिसर से बाहर भेजी जाती थीं। महिपाल सिंह का दावा है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार चंपत राय को शिकायत दी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाद में अनिल मिश्रा ने उन्हें जिम्मेदारी से हटाकर किसी अन्य व्यक्ति को यह दायित्व सौंप दिया। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की जानकारी एसआईटी को देने का निर्णय लिया।
चंपत राय पर विवादित संपत्ति समेत कई गंभीर आरोप
पूर्व लेखा प्रभारी ने चंपत राय पर आरोप लगाते हुए कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से मंदिर के आसपास कई विवादित संपत्तियां खरीदी गईं, जिनमें से कुछ मामले अभी न्यायालय में लंबित हैं। उनका दावा है कि इससे ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
150 किलोग्राम की जगह 85 किलो से बनवाया झूला
महिपाल सिंह ने एक अन्य आरोप में कहा कि 150 किलोग्राम चांदी का झूला बनवाने का आदेश दिया गया था, लेकिन उसमें केवल 85 किलोग्राम चांदी का उपयोग किया गया, जिससे भारी अनियमितता की आशंका पैदा होती है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चंपत राय के निवास भारत कुटी में बिना रसीद के चढ़ावा प्राप्त किया गया। कारसेवकपुरम स्थित विश्व हिंदू परिषद कार्यालय में आयोजित कई कार्यक्रमों का खर्च श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के धन से वहन किया गया, जिसकी जांच आवश्यक है।
चोरी को लेकर सबसे पहले महिपाल आए सामने
चंदा चोरी को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सबसे पहले 7 जून को आरोप लगाए थे। अखिलेश के आरोपों के बाद तत्काल बाद 9 जून को महिपाल सिंह ने सोशल मीडिया पर राम मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई आरोप सार्वजनिक किए थे। इसके बाद 26 जुलाई को एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत की ओर से उन्हें ई-मेल भेजकर आरोपों के समर्थन में साक्ष्य और विस्तृत लिखित शिकायत उपलब्ध कराने को कहा गया। ई-मेल में 27 जुलाई शाम 5 बजे तक शिकायत भेजने का समय दिया गया था और आवश्यकता पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उनका बयान दर्ज करने की बात भी कही गई थी।
उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज डिलीट किए गए थे, जिन्हें बाद में रिकवर किया गया और उनसे कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। महिपाल सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर का निर्माण दोषपूर्ण और वास्तु सिद्धांतों के विपरीत किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी लिखा कि उनके द्वारा दी गई जानकारी 100 प्रतिशत सत्य है, लेकिन कई घटनाएं पुरानी होने के कारण उनके पास सभी आरोपों के प्रत्यक्ष साक्ष्य अब उपलब्ध नहीं हैं।
