शिमला। हिमाचल में सार्वजनिक क्षेत्र के दूसरे सबसे बड़े उपक्रम हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की वित्तीय स्थिति पंक्चर हो गई है। हर रोज ढाई करोड़ की कमाई के बावजूद वेतन की लड़ाई है। किसी बस का शीशा टूटा है तो किसी बस में रूट बोर्ड के बजाए लाग बुक पर चौक से रूट का लिखा नाम मिलेगा।
बस की सीट कवर फटी है तो बारिश में छत से पानी टपकता मिल जाएगा। निगम की वर्कशॉप में स्पेयर पार्टस, लुब्रिकेंट, टायर की कमी है। समस्याएं भले ही छोटी दिखे, लेकिन विश्वसनीयता निगम की खराब होती है। लोगों ये कहना शुरू कर दिया है कि जो नीति निर्धारक बसों में सफर नहीं करते।
सफर करते तो शायद ये अव्यवस्थाएं न दिखती। निगम का दावा है कि पिछले तीन सालों में निगम ने 813 बसें खरीदी है, लेकिन इससे ज्यादा पुरानी बसें बेड़े से बाहर भी हुई है। निगम घाटे के जो कारण गिनाता है वह आज से नहीं बल्कि सालों से हैं।
यह है हालात
राज्य सरकार व निगम प्रबंधन घाटे से उबरने के लिए तमाम प्रयास कर रही है, लेकिन बोझ इतना ज्यादा बढ़ गया है कि घाटे से उबरना अब मुश्किल होता जा रहा है। एचआरटीसी के बेड़े में 3100 के करीब बसें शामिल है। रोजाना की कमाई 2.50 करोड़ यानी मासिक 75 करोड़ है।
वेतन पर हर महीने 46 करोड़ व पेंशन पर 23.50 करोड़ खर्च होता है। सरकार हर महीने एचआरटीसी को 50 से 55 करोड़ रुपये की ग्रांट देती है। निगम की अपनी कमाई केवल डीजल, बसों के ऋण, कलपुर्जों व अन्य मदों पर ही खर्च हो जाती है।
निगम को हर महीने 150 करोड़ रुपए की जरूरत रहती है और उसके पास कभी 130 करोड़ का जुगाड़ होता है, तो कभी 135 करोड़। हर महीने पांच से 10 से 12 करोड़ का घाटा होता है। यह बढकर सालाना 120 करोड़ तक पहुंच जाता है।
देनदारियों के लिए दूसरी बार ऋण लेने की नौबत
हालात इतने खराब हो चुके हैं कि सरकार दूसरी बार कर्मचारियों व पेंशनरों की देनदारियों के निपटारे के लिए ऋण लेने जा रही है। अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम की अध्यक्षता में हुई बैठक में देनदारियों की अदायगी के लिए ऋण लेने पर सहमति बनी है। इस प्रस्ताव को बीओडी में रखा जाएगा। इससे पहले निगम 150 करोड़ का ऋण पेंशनरों के देय लाभ देने के लिए ले चुका है।
एचआरटीसी का घाटा अभी से नहीं है। हर साल इसमें बढ़ोतरी हो रही है। निगम ने घाटे से उबारने के लिए कई कदम उठाए हैं। जिसमें सफलता भी बढ़ी है। निगम की आय में बढ़ोतरी हुई है। घाटे के बावजूद भी न तो वेतन रोका गया है न ही पेंशन। वेतन पेंशन की अदायगी में देरी जरूर हुई है लेकिन इस महीने समय पर इसकी अदायगी की गई है। -अजय वर्मा, उपाध्यक्ष एचआरटीसी
