लखनऊ। पंचायती राज विभाग ने कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए गए निवर्तमान प्रधानों के अधिकारों व कर्तव्यों पर स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए हैं।
प्रशासकों को केंद्र व राज्य सरकार की नई योजनाओं अथवा आयोग की संस्तुतियां जारी होने से संबंधित प्रस्ताव पर जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी से स्वीकृति लेनी होगी।
जिन ग्राम पंचायतों में पहले से प्रशासनिक समिति का गठन किया गया है अथवा प्रधान का पद पहले से रिक्त है, वहां सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) प्रशासक नियुक्त किए जाएंगे।
पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार द्वारा जारी आदेश में लिखा गया है कि ग्राम पंचायतोंं के सामान्य निर्वाचन-2026 के पश्चात चुनी गई नई पंचायतों की पहली बैठक अथवा अधिकतम छह माह की अवधि जो पहले होगा, तब तक के लिए निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया है।
प्रशासक सामान्य (रूटीन) कार्य करेंगे। नियुक्ति से पूर्व की तिथि से स्वीकृत दैनिक, निर्माणाधीन, मरम्मत कार्य के साथ ही जो कार्य पूरे हो गए हैं उनका भौतिक तथा तकनीकी मूल्यांकन कराते हुए भुगतान करा सकेंगे।
किसी भी नए कार्य को करने से पहले प्रशासक जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से संबंधित जिलाधिकारी से स्वीकृति लेंगे। प्रशासक अपने स्तर से कोई भी नीतिगत निर्णय नहीं लेंगे।
