शिमला। हिमाचल प्रदेश के हितों की रक्षा को लेकर मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की सरकार को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। बहुप्रतीक्षित किशाऊ बांध परियोजना को लेकर नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में प्रदेश के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला हुआ है।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह ने हिमाचल सदन में मीडिया को जानकारी दी कि वर्तमान सरकार के कड़े रुख के बाद अब नई शर्तों पर सहमति बन गई है, जिससे हिमाचल प्रदेश को बिना कोई राशि खर्च किए सालाना 600 करोड़ रुपये से अधिक की आय होगी।
किशाऊ बांध परियोजना को लेकर हुआ यह नया समझौता मुख्यमंत्री सुक्खू की एक बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में प्रदेश के विकास कार्यों को नए पंख लगेंगे। इस बैठक में हिमाचल के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान व उत्तर प्रदेश की ओर से अधिकारियों ने भी भाग लिया।
सुक्खू सरकार ने केंद्र के समक्ष मजबूती से रखा अपना पक्ष
उन्होंने बताया कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने पूर्व की जयराम ठाकुर सरकार के समय हुए समझौते को मानने से साफ इनकार कर दिया था, क्योंकि उसमें राज्य के वित्तीय हितों की अनदेखी की गई थी। सुक्खू सरकार ने केंद्र और संबंधित पक्षों के समक्ष राज्य का पक्ष मजबूती से रखा।
आखिरकार, गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुई इस बैठक में हिमाचल सरकार की नई शर्तों को स्वीकार कर लिया गया। यह प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और बड़ा और ऐतिहासिक फैसला है। राज्य सरकार के अथक और नीतिगत प्रयासों के कारण ही एक बार फिर प्रदेश के हितों की जीत हुई है।
परियोजना से हिमाचल को होने वाले मुख्य लाभ
प्रदेश को इस परियोजना के निर्माण या संचालन में अपने पास से कोई भी राशि खर्च नहीं करनी होगी। परियोजना में जैसे ही बिजली उत्पादन शुरू होगा, हिमाचल प्रदेश को हर साल 600 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिलना तय हुआ है। इस वित्तीय लाभ से प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आत्मनिर्भर हिमाचल के संकल्प को गति मिलेगी।
