शिमला। हिमाचल प्रदेश के गरीबों के आवास के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष ने एकजुटता का परिचय देते हुए कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ती निर्माण लागत को देखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत मिलने वाली आवास सहायता राशि को 1.50 लाख से बढ़ाकर 3.63 लाख करने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया।
विपक्ष के विधायक बिक्रम ठाकुर द्वारा लाए गए गैर सरकारी संकल्प की राशि बढ़ाने को लेकर सभी ने एकजुटता दिखाई। अब विधानसभा की यह सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। दुर्गम क्षेत्रों के लिए इससे भी अधिक राशि निर्धारित करने की सिफारिश की गई है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने सरकार की ओर से संकल्प का समर्थन करते हुए कहा कि मौजूदा राशि वास्तव में पर्याप्त नहीं है।
प्रदेश सरकार ने 3.63 लाख रुपये प्रति आवास का प्रस्ताव 15 फरवरी 2026 को केंद्र को भेजा था, लेकिन 12 अगस्त की बैठक में इसे मंजूरी नहीं मिली और सहायता राशि 1.30 लाख रुपये ही रखी गई।
90:10 के तहत प्रदेश सरकार 20 हजार रुपये प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि केंद्र से राशि बढ़ती है तो राज्य सरकार भी अपना हिस्सा बढ़ाकर करीब 50 हजार रुपये करने पर विचार कर सकती है।
मंत्री ने नेता प्रतिपक्ष से भी प्रदेश के हित में केंद्र के समक्ष यह मामला उठाने के लिए साथ दिल्ली चलने का आग्रह किया। हिमाचल सरकार जो अभी 20 हजार का टॉप अप दे रही है उसे भी 50 हजार रुपये किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि हिमाचल में 2023-24 से 2025-26 के बीच योजना के तहत 87,707 मकान स्वीकृत हुए, जिनमें 55,207 पूरे हो चुके हैं और 32,497 निर्माणाधीन हैं। वर्ष 2030 तक प्रदेश में 2.37 लाख से अधिक आवास बनाने का लक्ष्य है। इससे पूर्व बिक्रम ठाकुर ने राशि को बहुत कम बताया और संकल्प पारित करने की मांग की।
