शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बहुचर्चित चेस्टर हिल हाउसिंग प्रोजेक्ट में बेनामी संपतियों और धारा 118 के उल्लंघन की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका में राज्य सरकार सहित पूर्व मुख्य सचिव संजय को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी सी नेगी की खंडपीठ ने याचिका में दिए तथ्यों और दस्तावेजों के अवलोकन के पश्चात प्रतिवादियों को अगली सुनवाई तक जवाब दायर करने के आदेश दिए।
नगर निगम शिमला के पूर्व डिप्टी मेयर टिकेंद्र सिंह पंवर द्वारा दायर जनहित याचिका में हिमाचल प्रदेश सरकार में सचिव (गृह) राजस्व सचिव, उपायुक्त, सोलन ,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शिमला, नगर आयुक्त, सोलन, नगर निगम सोलन, उप मंडल अधिकारी सोलन व मैसर्ज एन जी एस्टेट चेस्टर हिल को प्रतिवादी बनाया है।
अधिवक्ता विनय शर्मा ने भी दायर की है याचिका
उल्लेखनीय है कि इन्हीं आरोपों को लेकर एक अन्य याचिका भी हाई कोर्ट के विचाराधीन है जिसमें प्रार्थी अधिवक्ता विनय शर्मा ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। उस याचिका में याचिकाकर्ता ने चेस्टर हिल हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में बेनामी संपतियों को लेकर आरोप लगाया है कि एक कृषक की वार्षिक आय वर्ष 2017 तक मात्र 6 लाख रुपये वार्षिक थी, जबकि पांच साल में ही वह दोगुना दिखा दी गई। इसके साथ ही कृषक ने 275 बीघा भूमि भी खरीद ली।
आरोप है कि कृषकों के नाम से धारा 118 की अनुमति लेकर प्रोजेक्ट निर्माताओं ने निर्माण कार्य शुरू किया।
करोड़ों की भूमि नाममात्र दाम चुका कर खरीदी
याचिकाकर्ता ने पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता पर गंभीर अनियमितताएं बरतने के आरोप लगाए और कहा कि राजस्व सचिव रहते उन्होंने प्रोजेक्ट निर्माताओं के पक्ष में गैरकानूनी निर्णय लिए जिसकी एवज में उन्होंने प्रोजेक्ट निर्माताओं से करोड़ों की भूमि नाममात्र दाम चुका कर खरीदी। मामले पर 20 जुलाई को अगली सुनवाई निर्धारित की गई है।
