चंडीगढ़। हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव को लेकर सोमवार को मतदान होगा। सत्तारूढ़ भाजपा जहां हैट्रिक लगाने की जुगत में है, वहीं दो बार पर्याप्त संख्याबल के बावजूद सीट गंवा चुकी कांग्रेस ने इस बार दाग धोने के लिए पूरी ताकत लगाई हुई है।
रविवार को लगातार दूसरे दिन दोनों पक्षों की ओर से विधायकों को वोट डालने का अभ्यास कराया गया, क्याेंकि मतदान में चूक पार्टी प्रत्याशी पर भारी पड़ सकती है। हालांकि दो विधायकों वाले इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं, जिसकी भूमिका क्रास वोटिंग की स्थिति में अहम हो सकती है।
रविवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ के लग्जरी होटल में भाजपा और निर्दलीय विधायकों को गुरु मंत्र दिए, तो शिमला में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कांग्रेसियों को एकता का पाठ पढ़ाया।
कांग्रेस के छह विधायक पहले ही चंडीगढ़ में
सेंधमारी के भय से तीन दिन से हिमाचल प्रदेश में ठहराये गए सभी 31 विधायक सुबह लौट आएंगे और कड़ी सुरक्षा में विधानसभा पहुंचेंगे। विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित कांग्रेस के छह विधायक पहले ही चंडीगढ़ में मौजूद हैं।
मतदान के पूर्व दिवस पर भाजपा व कांग्रेस की दिन भर रणनीतिक बैठकें होती रही। भाजपा के सभी विधायक चंडीगढ़ में जमे हैं। चुनाव में मुख्यमंत्री नायब सैनी की जहां परीक्षा होगी, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री एवं विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की प्रतिष्ठा दांव पर है।
पिछले दो चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी हारते रहे हैं। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर लगी हुई हैं कि इस बार भी कांग्रेस की हार की हैट्रिक होगी या फिर भाजपा की पुरानी रणनीति फेल होती है।
खराब मौसम के चलते कांग्रेस विधायक कुफरी से कसौली शिफ्ट
शनिवार की शाम भाजपा की माक वोटिंग में तीन विधायकों के वोट रद हुए थे। इसे गंभीरता से लेते हुए रविवार को दोबारा वोट डालने का अभ्यास कराया गया।
इसी तरह हिमाचल प्रदेश में ठहरे कांग्रेस विधायकों को वोट डालने की प्रेक्टिस करवाई गई। दोपहर में लंच के बाद कांग्रेस के सभी विधायकों को खराब मौसम की आशंका के चलते कुफरी से कसौली शिफ्ट कर दिया गया।
हालांकि, पहले इन विधायकों को परवाणु शिफ्ट करने की चर्चाएं थी, लेकिन कांग्रेस ने रणनीति बदलते हुए विधायकों को कसौली के रमाडा होटल में ठहराया, जहां 40 कमरे बुक किए गए थे। यह जगह चंडीगढ़ से 60 किलोमीटर दूर है और सोमवार को मौसम खराब होने के बावजूद विधायकों को आसानी से चंडीगढ़ पहुंचाया जा सकता है।
राज्यसभा की खाली हो रही दोनों सीटों पर अभी भाजपा के सदस्य हैं। 90 सदस्यीय विधानसभा में विधायकों के संख्या बल के आधार पर इस बार एक सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाएगी।
एक सीट पर भाजपा के संजय भाटिया की जीत पक्की है, जबकि दूसरी सीट के लिए कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध और भाजपा समर्थित निर्दलीय सतीश नांदल में सीधा मुकाबला है।
विधानसभा में सुबह नौ बजे शुरू होगा मतदान
विधानसभा में सुबह नौ बजे मतदान शुरू होगा। पूर्व की तरह इस बार भी बैलेट पेपर से ही चुनाव होंगे। सभी 90 विधायकों को मतदान का अधिकार होगा।
विधायकों को चुनाव आयोग द्वारा दिए गए पैन का ही इस्तेमाल करना होगा। कोई दूसरा पैन मान्य नहीं होगा। चूंकि राज्यसभा चुनाव में राजनीतिक दलों की ओर से व्हिप जारी नहीं किया जा सकता, इसी वजह से क्रास वोटिंग राजनीतिक खेल होने की संभावना बनी रहती है।
राज्यसभा सदस्य बनने के लिए चाहिए 31 वोट
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 31 विधायकों के वोट की जरूरत होगी। भाजपा के पास अपने 48 विधायकों के साथ ही तीन विधायकों का भी समर्थन है। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं।
इनेलो के दो विधायक किस ओर जाएंगे, यह अभी साफ नहीं हुआ है। राज्यसभा चुनाव के लिए विधायक सभी उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग वोट नहीं डालते, बल्कि उन्हें एक ही बैलेट पेपर पहली, दूसरी और तीसरी प्राथमिकता बतानी होती है।
भाजपा ने विधायकों को समझाया
चंडीगढ़ के जेडब्ल्यू मैरियट होटल में वोटिंग के अभ्यास के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, चुनाव प्रभारी हर्ष सांघवी, प्रदेश प्रभारी सतीश पूनिया और प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने विधायकों को वोटिंग की प्रक्रिया और रणनीति समझाई।
सभी विधायकों को बताया गया है कि कौन संजय भाटिया को पहली पसंद बताएगा और कौन विधायक सतीश नांदल के सामने पहली प्राथमिकता दर्ज करेगा। 31 विधायक भाटिया को पहला विकल्प चुनेंगे, जबकि शेष 20 विधायक नांदल को।
