शिमला। भारत की नदियों का पानी पहले हिमाचल, पंजाब, हरियाणा समेत अपने राज्यों की जरूरत पूरी करे, उसके बाद ही पाकिस्तान को देने की बात होनी चाहिए।
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने सोमवार को लोक भवन में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में साफ कहा कि आज देश में मजबूत सरकार है और अब बिना वजह कोई मेहरबानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को पहले भी बहुत सी सुविधाएं दी गईं, जिनका वह हकदार नहीं था।
उन्होंने कहा कि जब-जब पाकिस्तान ने हिमाकत की, भारत ने उसे घर में घुसकर जवाब दिया है। आज हमारे सुरक्षा बल हर नापाक हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 1947 में आजादी के समय कई गलतियां हुईं या करवाई गईं। पाकिस्तान पहले भारत का ही हिस्सा था, मगर अलग राष्ट्र बनते ही उसने आतंकवाद को बढ़ावा देकर भारत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
कविंद्र गुप्ता ने कहा कि भारत ने हमेशा पड़ोसी से दोस्ती का हाथ बढ़ाया, लेकिन पाकिस्तान ने हर बार पीठ में छुरा घोंपा। कारगिल से लेकर पठानकोट और पुलवामा तक, उसकी साजिशें जगजाहिर हैं। अब नीति साफ है, सुधरोगे तो बात होगी, नहीं तो जवाब मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज आएगा, तभी सुविधाएं देने पर विचार किया जा सकता है।
पानी पर क्यों आई ऐसी बात?
सिंधु जल संधि के तहत भारत से पाकिस्तान को जाने वाली तीन पश्चिमी नदियों झेलम, चिनाब और रावी के पानी पर लंबे समय से चर्चा चल रही है। हिमाचल और पंजाब के किसान अक्सर शिकायत करते हैं कि गर्मियों में नहरें सूखी रह जाती हैं, जबकि संधि के कारण भारत अपने हिस्से का पूरा पानी भी इस्तेमाल नहीं कर पाता।
राज्यपाल के ताजा बयान को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। 1947 की गलती का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बंटवारे के समय पानी और जमीन के बंटवारे में कई चूक हुईं।
पाकिस्तान को बिना शर्त बहुत कुछ दे दिया गया। उसका नतीजा आज तक देश भुगत रहा है। अब वक्त बदल गया है। देश की पहली जरूरत अपने किसान, अपने गांव और अपने शहर हैं।
