शिमला। हिमाचल की 3,758 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के कामकाज की अहम कड़ी रहे 1,023 ग्राम रोजगार सेवकों के लिए सरकार ने नियमितीकरण और पंचायत सचिव के पदों पर समायोजन की उम्मीदों पर फिलहाल विराम लग गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि जीआरएस ग्रामीण विकास विभाग के नियमित कर्मचारी नहीं हैं और उन्होंने विभाग में दैनिक वेतनभोगी के रूप में भी आवश्यक सेवा अवधि पूरी नहीं की है। पंचायत सचिवों की भर्ती के लिए अलग भर्ती एवं पदोन्नति नियम हैं, जिनमें जीआरएस के समायोजन का प्रविधान नहीं है। इसलिए पंचायत सचिव के रिक्त पदों पर समायोजन संभव नहीं है।
1 जुलाई 2026 से जीआरएस को विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 यानी वीबी-जी राम जी की नई योजना में शामिल कर लिया गया है।1 जुलाई के बाद वेतन का भुगतान नई योजना के प्रशासनिक मद से किया जा रहा है।
जबकि फरवरी 2026 से जून 2026 तक पांच महीने का वेतन लंबित रहा।मनरेगा के प्रशासनिक मद में 20.50 करोड़ रुपये की राशि केंद्र से नहीं मिली।केंद्र को 2 अप्रैल से 3 अगस्त 2026 के बीच 12 बार पत्र भेजकर आग्रह किया गया।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि पंचायत सचिवों की भर्ती के लिए अलग भर्ती एवं पदोन्नति नियम हैं, जिनमें जीआरएस के समायोजन का प्रविधान नहीं है।
