शिमला। हिमाचल सरकार ने 2024 में लाए गए अनुबंध कर्मचारियों से जुड़े अधिनियम को रद करने के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने 25 अप्रैल, 2026 को हिमाचल प्रदेश भर्ती व सरकारी कर्मचारी सेवा शर्तें अधिनियम-2024 को रद कर दिया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि कर्मचारियों के सभी बकाया और लाभ तीन महीने के भीतर दिए जाएं।
कोर्ट ने कहा था कि विधेयक को रद किए जाने से प्रतिवादी राज्य और उसके पदाधिकारियों द्वारा इस अधिनियम के आधार पर की गई सभी परिणामी कार्रवाई चूकें और कार्य अवैध, असंवैधानिक और शून्य घोषित किए जाते हैं।
कर्मचारी पहुंचे थे हाई कोर्ट
शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने हाई कोर्ट में चुनौती देकर इसे रद करने की मांग की थी, जिसके बाद कई अन्य याचिकाएं भी जुड़ गई थीं। शिक्षा विभाग ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
तीन माह में लाभ देने का दिया था आदेश
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि अगले तीन माह के भीतर पात्र कर्मचारियों को अदालती फैसलों के अनुरूप सभी अनुबंध सेवा लाभ सुनिश्चित करे। राज्य की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है और इस आदेश को लागू करने से सरकार पर करोड़ों की वित्तीय देनदारियां पड़ रही हैं।
सुनवाई तय नहीं
सुप्रीम कोर्ट में अभी मामले की सुनवाई तय नहीं हुई है। यह मामला प्रदेश के हजारों कर्मचारियों से जुड़ा हुआ है। हाई कोर्ट के इस फैसले से राज्य के सरकारी विभागों, बोर्ड और निगमों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली थी, लेकिन अब यह मामला फिर से कोर्ट में पहुंच गया है।
क्या था मामला
वर्ष 2024 में हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के हक में फैसला दिया था। इसी साल सरकार ने एसएलपी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया था। दिसंबर 2024 में सरकार ने विधानसभा में विधेयक पास किया, जिसे कर्मचारियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने इस विधेयक को रद्द किया था।
