देहरादून। चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने नया सिस्टम एक्टिव कर दिया है। अब जमाखोरी को रोकने के लिए प्रदेश सरकार छापेमारी के भरोसे नहीं रहेगी। सरकार ने चीनी खरीद और खपत पर पूरी निगरानी बिठा दी है।
चीनी मिलों और डीलरों से बड़े उपभोक्ताओं को हो रही बिक्री की निगरानी जीएसटी रिटर्न से की जाएगी। उपभोक्ता द्वारा बाजार से खरीदी गई चीनी व खपत का मिलान कर यह पता लगाया जाएगा कि कहीं जरूरत से ज्यादा चीनी जमा तो नहीं की जा रही।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने 19 अगस्त को चीनी के बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टाक रखने की सीमा तय कर दी है। इसके तहत हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी की खपत करने वाले थोक उपभोक्ता 15 दिन की जरूरत से ज्यादा चीनी का स्टाक नहीं रख सकेंगे। यह व्यवस्था एक सितंबर से लागू होगी और 30 नवंबर, 2026 तक प्रभावी रहेगी।
औसत खपत से बड़े खरीदारों की श्रेणी तय होगी
स्टाक सीमा के दायरे में कौन आएगा, इसका निर्धारण पिछले एक वर्ष की औसत मासिक खपत के आधार पर किया जाएगा। मौजूदा महीने को छोड़कर यदि किसी संस्थान की औसत मासिक खपत 10 मीट्रिक टन से अधिक है, तो उसे बड़े उपभोक्ता की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे उपभोक्ता अधिकतम 15 दिन की औसत जरूरत के बराबर चीनी ही अपने पास रख सकेंगे।
सरकारी संस्थानों को छूट
केंद्र सरकार, राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन और स्थानीय निकायों से जुड़े संस्थानों को स्टाक सीमा से छूट दी गई है। निजी क्षेत्र के बड़े उपभोक्ताओं के लिए 15 दिन की सीमा अनिवार्य होगी। अब बड़े खरीदारों के लिए चीनी जमा करने से ज्यादा अहम उसकी खपत साबित करना होगा।
