लखनऊ: उत्तर प्रदेश के प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा यानी पीएमएचएस संवर्ग के डॉक्टरों के लिए सुपर स्पेशियलिटी समेत उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों की पढ़ाई करना अब आसान हो गया है. प्रदेश सरकार ने डॉक्टरों को उच्च चिकित्सा शिक्षा हासिल करने की अनुमति देने के लिए एक नई और बेहतर व्यवस्था लागू कर दी है. हालांकि इस सुविधा के साथ एक बड़ी शर्त यह जोड़ी गई है कि पढ़ाई पूरी होने के बाद डॉक्टरों को 10 साल तक सरकारी अस्पतालों में अनिवार्य रूप से अपनी सेवाएं देनी होंगी. अगर कोई डॉक्टर इस नियम का पालन नहीं करता है, तो उसे जुर्माने के तौर पर एक करोड़ रुपये का भारी-भरकम बॉंड भरना होगा.
शासनादेश जारी और दाखिले के लिए तय किए गए नियम: उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य विभाग के मंत्री ब्रजेश पाठक के खास निर्देशों के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी ने इस संबंध में विस्तृत शासनादेश जारी कर दिया है. सरकार का मानना है कि इस अहम फैसले से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ और सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टरों की भारी उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे आम मरीजों को और बेहतर इलाज मिल सकेगा. नए शासनादेश के मुताबिक पीजी डिग्री और डिप्लोमा धारक डॉक्टर नीट या समकक्ष प्रवेश परीक्षा के माध्यम से इन उच्चतर पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकेंगे. इसके लिए विभागीय अनुमति होना अनिवार्य है और आवेदन करने वाले डॉक्टर के खिलाफ किसी भी तरह की सतर्कता जाँच या आपराधिक मामला लंबित नहीं होना चाहिए.
आयु सीमा और अध्ययन अवकाश से जुड़ी खास बातें: उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने के लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना आवेदन वर्ष से पहले के वर्ष की 31 दिसंबर से होगी. पहली बार अनुमति लेकर पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों को दो वर्ष का विशेष अध्ययन अवकाश और एक वर्ष का बिना वेतन असाधारण अवकाश दिया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों की एमबीबीएस और पीजी की मूल डिग्रियां महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं कार्यालय में सुरक्षित जमा रहेंगी. यदि कोई डॉक्टर बीच में ही पढ़ाई छोड़ देता है, तो उसे अगले पाँच साल तक किसी अन्य उच्चतर कोर्स में प्रवेश लेने की अनुमति नहीं मिलेगी.
नियम तोड़ने पर लगेगा भारी जुर्माना और दो करोड़ तक का बॉंड: शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई डॉक्टर पहले भी पीजी कर चुका है और दोबारा उच्च शिक्षा ले रहा है, तो उसे कुल मिलाकर 15 साल तक सरकारी सेवा पूरी करनी होगी. पुरानी सेवा शर्तों का उल्लंघन करने पर एक करोड़ रुपये और नई पढ़ाई की शर्तों का उल्लंघन करने पर एक अतिरिक्त करोड़ रुपये का बॉंड देना पड़ सकता है. इस प्रकार नियमों का पूरी तरह पालन न करने वाले डॉक्टरों पर अधिकतम दो करोड़ रुपये तक की देनदारी आ सकती है. सरकार का यह नया शासनादेश तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है.
