लखीमपुर। लखीमपुर खीरी जिले के कद्दावर नेता, चार बार के विधायक व भाजपा जिलाध्यक्ष रहे बाला प्रसाद अवस्थी का 76 वर्ष की उम्र में शुक्रवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। शुक्रवार शाम को उन्होंने अपने आवास पर अन्तिम सांस ली। धौरहरा विधानसभा के ईसानगर के बेल्तुआ गांव में रहने वाले बाला प्रसाद अवस्थी पहली बार 1991 में भाजपा से धौरहरा से भाजपा विधायक बने।
साल 2007 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का दामन थामा और धौरहरा से फिर विधायक चुने गए। इसके बाद 2012 के चुनाव में बसपा ने उन्हें मोहम्मदी से मैदान में उतारा। जहां से भी उन्होंने जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने फिर भाजपा में वापसी की और 2017 में वह एक बार फिर धौरहरा से विधायक बने। 2022 के चुनाव से वह सक्रिय राजनीति से दूर थे। वह पिछले काफी समय से बीमार चल रहे बाला प्रसाद अवस्थी का निशन शुक्रवार की शाम को हो गया। उनके निधन से उनके परिवार व समर्थकों में शोक की लहर है। भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता, गोला नगर पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू, मीडिया प्रभारी रमेश मिश्रा, भाजपा नेता दीपक पुरी आदि ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
उतार चढ़ाव भरा रहा बाला प्रसाद का राजनीतिक सफर
जिले के दिग्गज नेता और पूर्व विधायक बाला प्रसाद अवस्थी का शुक्रवार दोपहर बाद निधन हो गया। भाजपा से राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले बाला प्रसाद अवस्थी दो बार बसपा से भी विधायक रहे। इसके बाद फिर भाजपा में आकर 2017 में धौरहरा से चुनाव जीता। 2022 के चुनाव से पहले 15 दिनों के लिए वह सपा में शामिल हो गए। इसके बाद फिर भाजपा में आ गए। बाला प्रसाद अवस्थी के समर्थक उनको बाला दद्दू के नाम से पुकारते थे।
पहली बार धौरहरा से चुने गए थे विधायक
बाला प्रसाद अवस्थी का राजनीतिक सफर काफी लंबा, उतार-चढ़ाव भरा और प्रभावशाली रहा। उन्होंने कुल चार बार विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, वह भी दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से। इसमें तीन बार वह धौरहरा से और एक बार मोहम्मदी सीट से विधायक रहे। उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत साल 1991 में हुई, जब वे पहली बार भाजपा के टिकट पर धौरहरा से विधायक बने। उनकी संगठन क्षमता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें जिलाध्यक्ष का दायित्व भी सौंपा था। साल 2007 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का दामन थामा और धौरहरा से फिर विधायक चुने गए। 2012 के चुनाव में बसपा ने उन्हें मोहम्मदी से मैदान में उतारा, जहां से भी उन्होंने जीत दर्ज की। बाला प्रसाद ने 2017 में फिर भाजपा में वापसी की और एक बार फिर धौरहरा से विधायक चुने गए। हालांकि बताते हैं कि 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने भाजपा छोड़कर 15 दिनों के लिए समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली थी, इसकी वजह से उन्हें टिकट नहीं मिल सका।
