फिरोजाबाद। तहसीलदार राखी शर्मा ने मीडिया के सामने केवल आरोप ही नहीं लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास भ्रष्टाचार के साक्ष्य भी है। यदि डीएम द्वारा उपयोग किए जा रहे मोबाइल फोन की जांच कर ली जाए तो पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी। फोन का बिल भी है। फोन के संबंध में तहसीलदार और डीएम के ओएसडी की बातचीत का एक ओडियो भी प्रसारित हुआ है।
तहसीलदार बोलीं फोन में पड़ी है डीएम की सिम, बिल मेरे पास है
तहसीलदार ने मीडियाकर्मियों को सुबह 11 बजे टूंडला तहसील स्थित अपने कार्यालय में बताया कि चार नवंबर 2025 को उन्होंने रात में आगरा का एक मोबाइल स्टोर खुलवाकर अपने नाम से फोन खरीदा था। जिसे उसी रात कलक्ट्रेट स्टाफ द्वारा रिसीव किया गया था। उस फोन में डीएम साहब की सिम चल रही है। मोबाइल नंबर और उसके बिल के मिलान से ही आरोपों की कलई खुल जाएगी।
तहसील स्तरीय अधिकारियों को दबाव बनाने के लिए नहीं दी जाती छुट्टी
तहसीलदार ने यह भी कहा कि सभी जगह नायब तहसीलदार और तहसीलदार के आकस्मिक अवकाश एसडीएम द्वारा स्वीकृत किए जाते हैं, लेकिन जिले में दबाव बनाने के लिए छुट्टी के प्रार्थना पत्र डीएम कार्यालय मंगाए जाते हैं। बीडीओ को अवकाश देने का अधिकार सीडीओ को है, लेकिन उनकी छुट्टी भी डीएम कार्यालय से ही स्वीकृत होती हैं। एक बार खौलता पानी गिरने से उनका हाथ जल गया था। इसके बाद भी उन्हें छुट्टी नहीं दी गई।
करोड़ाें रुपये की जमीन में संलिप्त है बाबुओं का रैकेट
तहसीलदार ने बताया कि कलेक्ट्रेट और तहसीलों में तैनात बाबुओं के भ्रष्टाचार की जांच उनके पास आई थी। उन पर करोड़ों रुपये की जमीन हथियाने के आरोप थे। डीएम साहब जांच में लीपापोती करने को दबाव बना रहे थे। मना करने पर उन्हें परेशान किया जा रहा है।
प्रसारित ऑडियो में ये हैं बातें
इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित 1.10 मिनट के ओडियाे में दो लोगों के बीच आगरा के एक स्टोर से मोबाइल फोन खरीदने की बात हो रही है। कहा जा रहा है कि जिन दो लोगों में बातचीत हो रही है। उनमें से एक तहसीलदार राखी शर्मा और दूसरे डीएम के ओएसडी शीलेंद्र शर्मा हैं। हालांकि जागरण इसकी पुष्टि नहीं करता है।
तहसीलदार: मैं तो ड्राईवर भेज रही हूं। वह बहुत फास्ट चलाता है। 20 मिनट में (आगरा) पहुंच जाएगा। मैंने उसे यहीं बुला लिया है, बाहर खड़ा है।
ओएसडी: आप अपना आदमी भेज रहे हो।
तहसीलदार: हां, मैं अपना आदमी भेज रही हूं। क्योंकि आगरा से भी वह बंदा आएगा तो उसको भी 20 से 25 मिनट लगेंगे। यहां से भी 20 से 25 मिनट लगेंगे।
ओएसडी: 20 से 25 मिनट में आराम से पहुंच जाएगा।
तहसीलदार: पहुंच जाएगा। उस लड़के को बोल दो स्टोर पर खड़ा रहे, बंद न हो स्टोर। मेरा लड़का आधा घंटे में पहुंच जाएगा वहां पर।
तहसीलदार: ड्राइवर से मोबाइल भी मंगा लेती हूं।
ओएसडी: हां उससे बोल देना टेंपर्ड चढ़वाकर लाए।
तहसीलदार: आप कहेंगे तो सुबह मोबाइल भिजवा दूंगी या रात को ही भिजवा दूंगी।
ओएसडी: अभी भिजवा देना कोई दिक्कत नहीं।–इसके बाद फोन कट हो जाता है।
कलेक्ट्रेट कर्मचारियों ने तहसीलदार को बताया भ्रष्ट, कार्रवाई की मांग
फिरोजाबाद। तहसीलदार राखी शर्मा द्वारा डीएम के विरुद्ध मोर्चा खोलने के बाद कलक्ट्रेट कर्मचारी तहसीलदार के विरुद्ध लामबद्ध हो गए हैं। उत्तर प्रदेशीय मिनिस्ट्रीयल कलक्ट्रेट कर्मचारी संघ ने शुक्रवार शाम आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद और मंडलायुक्त आगरा को पत्र भेजकर तहसीलदार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया है
संघ प्रांतीय महामंत्री अजीत उपाध्याय, जिला अध्यक्ष प्रदीप शर्मा, जिला मंत्री सुमित कुमार का कहना है कि तहसीलदार ने प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र खन्ना, दौजीराम और ओएसडी शीलेंद्र शर्मा पर झूठे आरोप लगाकर उनकी छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया है।
डीएम और राजस्व कर्मियों पर झूठे आरोप लगाए
पदाधिकारियों का कहना है कि तहसीलदार द्वारा आगरा निवासी सुनयन शर्मा को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए जमीनी विवाद का मामला सिविल न्यायालय में विचाराधीन होने के बाद भी ऑनलाइन शिकायत कराकर जांच की गई। इसके सुनयन शर्मा के पक्ष में रिपोर्ट लगा दी। अब डीएम और राजस्व कर्मियों पर झूठे आरोप लगाए गए हैं। पत्र में तहसीलदार का स्थानान्तरण दूसरे जिले में करने की मांग की गई है।
भाजपा जिलाध्यक्ष का पत्र प्रसारित
शुक्रवार को गहमागहमी के बीच दोपहर में भाजपा जिलाध्यक्ष उदय प्रताप का एक पत्र इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो गया, जो मुख्यमंत्री के नाम था। इसमें लिखा था कि तहसीलदार राखी शर्मा भ्रष्ट है। उनके विरुद्ध जांच कर निलंबन की कार्रवाई की जाए। हालांकि शाम को जिलाध्यक्ष ने इसका खंडन करते हुए कहा कि किसी ने उनके लैटरपैड का दुरुपयोग किया है। उन्होंने इस तरह का कोई पत्र नहीं लिखा है।
